77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि देश और विदेश में रहने वाले सभी भारतीय उत्साह और एकजुटता के साथ इस राष्ट्रीय पर्व को मना रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा, “हम भारत के लोग, चाहे देश में हों या विदेश में, गणतंत्र दिवस को बड़े उत्साह के साथ मना रहे हैं। मैं आप सभी को इस राष्ट्रीय पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं।” उन्होंने संविधान के मूल्यों, समानता और लोकतंत्र की मजबूती पर भी जोर दिया।
राष्ट्रपति के संबोधन के बाद गणतंत्र दिवस को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच से भी शुभकामनाओं का सिलसिला तेज हो गया। कई वैश्विक नेताओं ने भारत को एक मजबूत लोकतंत्र, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और वैश्विक शांति में अहम भूमिका निभाने वाला देश बताया। संदेशों में भारत की तकनीकी प्रगति, सांस्कृतिक विविधता और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना की भी विशेष रूप से चर्चा की गई।
विदेशी नेताओं ने अपने संदेशों में भारत और अपने-अपने देशों के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों का जिक्र किया। कई नेताओं ने भारत के साथ व्यापार, रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग को और गहरा करने की इच्छा भी जताई। खासतौर पर लोकतंत्र, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक शांति और विकास जैसे विषयों पर भारत की भूमिका को सराहा गया।
गणतंत्र दिवस के मौके पर भारतीय प्रवासी समुदायों ने भी दुनिया के अलग-अलग देशों में उत्सव मनाया। तिरंगा फहराया गया, सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए और भारत की उपलब्धियों को याद किया गया। इससे साफ झलकता है कि भारत का गणतंत्र सिर्फ उसकी सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में बसे भारतीयों के दिलों में बसता है।
कुल मिलाकर, 77वें गणतंत्र दिवस पर भारत को मिली वैश्विक शुभकामनाएं यह दर्शाती हैं कि भारत आज न सिर्फ एक मजबूत लोकतंत्र है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी एक प्रभावशाली और सम्मानित राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है।
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