1. जीडीपी ग्रोथ रेट
देश की आर्थिक रफ्तार का सबसे बड़ा पैमाना जीडीपी ग्रोथ है। सरकार का फोकस 7% से ऊपर की निरंतर वृद्धि बनाए रखने पर रहेगा।
2. महंगाई दर
खाद्य और ईंधन कीमतों के चलते महंगाई अभी भी चिंता का विषय है। बजट में इसे काबू में रखने के उपायों पर संकेत मिल सकते हैं।
3. राजकोषीय घाटा
फिस्कल डिसिप्लिन सरकार की प्राथमिकता है। राजकोषीय घाटे को 4.5% के लक्ष्य की ओर ले जाने की रणनीति अहम होगी।
4. कर संग्रह
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर संग्रह में मजबूती जरूरी है। GST और इनकम टैक्स के आंकड़े सरकार की सेहत बताएंगे।
5. निजी निवेश
कमजोर निजी निवेश अर्थव्यवस्था की बड़ी चुनौती है। बजट में निवेश बढ़ाने के लिए इंसेंटिव्स पर नजर रहेगी।
6. विनिवेश लक्ष्य
पिछले वर्षों में विनिवेश लक्ष्य पूरे नहीं हो पाए। इस बार सरकार कितना यथार्थवादी लक्ष्य रखती है, यह अहम होगा।
7. इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च
सड़क, रेलवे, बंदरगाह और शहरी विकास पर कैपेक्स खर्च ग्रोथ का इंजन माना जा रहा है।
8. रोजगार के आंकड़े
युवा आबादी के लिए रोजगार सृजन सबसे बड़ा मुद्दा है। स्किल डेवलपमेंट और जॉब क्रिएशन से जुड़े आंकड़े अहम होंगे।
9. सामाजिक क्षेत्र का खर्च
शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण पर आवंटन ‘विकसित भारत’ की बुनियाद तय करेगा।
10. कर्ज और ब्याज बोझ
सरकारी कर्ज और उस पर ब्याज भुगतान बजट की स्थिरता के लिए निर्णायक फैक्टर रहेगा।
निष्कर्ष
बजट 2026-27 सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि ‘विकसित भारत’ के रोडमैप का अहम पड़ाव है। वित्त मंत्री सीतारमण के ये 10 आंकड़े तय करेंगे कि भारत तेज विकास के साथ महंगाई, रोजगार और निवेश जैसी चुनौतियों से कैसे निपटने की तैयारी कर रहा है।
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