2025 वर्ष को जलवायु विज्ञान की नई चेतावनी के रूप में दर्ज किया जा रहा है। Copernicus Climate Change Service की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2025 दुनिया के इतिहास के तीनों सबसे गर्म वर्षों में से एक रहा, और इसका औसत तापमान रिकॉर्ड के करीब पहुंच गया है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि 2023–2025 की तीन साल की औसत तापमान पहली बार औद्योगिक काल (1850–1900) की तुलना में 1.5 °C से अधिक हो सकती है, जिससे पेरिस समझौते द्वारा निर्धारित जलवायु लक्ष्य को पार करना और भी संभव लगता है।
तापमान रिकॉर्ड और 2025 की स्थिति:
🔹 2025 को 2023 और 2024 के बाद या उनके बराबर तीसरा सबसे गर्म साल माना जा रहा है।
🔹 वैश्विक औसत सतही तापमान औद्योगिक स्तर से तकरीबन 1.47 °C से ऊपर रहा, जो पिछले वर्षों की ऊँची तापमान प्रवृत्ति को दर्शाता है।
🔹 Arctic (उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्र) ने अपने इतिहास का तीसरा सबसे गर्म वर्ष दर्ज किया है, जबकि Antarctic (दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र) भी सामान्य से काफी ऊपर तापमान पर रहा।
हीट स्ट्रेस और मानवीय प्रभाव:
2025 में ध्रुवीय तथा भूमध्य रेखा के करीब रहने वाले क्षेत्रों में तापमान इतना बढ़ा कि आधा से अधिक भूमि क्षेत्र में “हीट स्ट्रेस” (32 °C का महसूस तापमान या उससे अधिक) सामान्य से ज्यादा दिनों तक रहा। यह स्थिति मौसम से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को गंभीर रूप से बढ़ाती है। हीट स्ट्रेस को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) मौसम से जुड़ी मौतों का प्रमुख कारण मानता है, खासतौर पर बुज़ुर्गों और संवेदनशील आबादी के लिए।
जंगल की आग और वायु प्रदूषण:
ईस्टर्न यूरोप व उत्तरी अमेरिका सहित कई क्षेत्रों में भयंकर जंगल की आग भी देखने को मिली, जिससे वायु गुणवत्ता और स्वास्थ्य जोखिम और बढ़ गए। कण प्रदूषण (PM) और ओज़ोन स्तर में वृद्धि से सांस संबंधी रोगों तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ा।
1.5 °C लक्ष्य की चुनौती:
वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों की इस गर्मी की रफ्तार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 1.5 °C लक्ष्य को प्राप्त करना अब पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है। यदि वैश्विक तापमान इसी गति से बढ़ता रहा, तो यह सीमा सदी के मध्य या उससे पहले ही पार हो सकती है, जिसका प्रभाव जलवायु आपदाओं और मानव स्वास्थ्य पर और भी गहरा होगा।
निष्कर्ष:
2025 को तीसरा सबसे गर्म वर्ष माना जाना महत्वपूर्ण संकेत है कि वैश्विक तापमान बढ़ रहा है और पृथ्वी तेजी से गर्म हो रही है। हीट स्ट्रेस, जंगल की आग, वायु प्रदूषण और ध्रुवीय तापमान रिकॉर्ड इस बात के सबूत हैं कि जलवायु संकट वास्तविक और तीव्र है। जलवायु बदलाव के खिलाफ वैश्विक प्रयासों को और तेज़ करने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
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