संजू सैमसन को सीमित ओवरों के क्रिकेट में एक प्रतिभाशाली और आक्रामक बल्लेबाज माना जाता है। आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में उन्होंने कई बार अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निरंतरता की कमी उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बनकर सामने आई है। खासकर टी20 फॉर्मेट में, जहां तेज रन बनाने के साथ-साथ स्थिरता भी जरूरी होती है, वहां सैमसन उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं।
हाल के टी20 मुकाबलों में सैमसन को पर्याप्त मौके मिले, लेकिन वे उन अवसरों को बड़े स्कोर में बदलने में विफल रहे। कभी शुरुआती ओवरों में गैरजरूरी शॉट खेलकर आउट होना, तो कभी अच्छी शुरुआत के बाद विकेट गंवा देना—यही कहानी बार-बार दोहराई गई। टीम प्रबंधन के लिए यह स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि टी20 विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में हर खिलाड़ी का फॉर्म में होना बेहद जरूरी होता है।
भारतीय टीम के पास विकेटकीपर-बल्लेबाज के विकल्पों की कमी नहीं है। ऐसे में संजू सैमसन का लगातार फ्लॉप होना चयनकर्ताओं के लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या विश्व कप जैसे बड़े मंच पर अनुभव और भरोसे को प्राथमिकता दी जाएगी या फिर फॉर्म को आधार बनाकर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि संजू सैमसन के पास अब ज्यादा समय नहीं बचा है। अगर उन्हें विश्व कप से पहले आखिरी कुछ मैचों में मौका मिलता है, तो वहां बड़ा और निर्णायक प्रदर्शन करना उनके लिए बेहद जरूरी होगा। वरना टीम प्रबंधन किसी ऐसे खिलाड़ी पर भरोसा जता सकता है, जो हालिया फॉर्म में बेहतर नजर आ रहा हो।
फैंस के बीच भी सैमसन को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग अब भी उनकी प्रतिभा पर भरोसा जता रहे हैं, तो वहीं कई लोग मानते हैं कि बार-बार मौके मिलने के बावजूद प्रदर्शन न करना उनके खिलाफ जा सकता है।
कुल मिलाकर, टी20 विश्व कप से ठीक पहले संजू सैमसन का खराब फॉर्म भारतीय टीम के लिए एक बड़ी चिंता बन चुका है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि वह इस दबाव से उबरकर टीम के भरोसे पर खरे उतरते हैं या फिर विश्व कप की टीम में उनकी जगह खतरे में पड़ जाती है।
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