दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर ने एक बार फिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मंदिर परिसर में अब एक विशाल और दिव्य प्रतिमा स्थापित की गई है, जो नीलकंठ वर्णी भगवान की है। यह प्रतिमा न केवल अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसे फ्लाईओवर से भी देखा जा सकता है, जिससे यह शहर के नए लैंडमार्क के रूप में उभर रही है।
प्रतिमा की खासियत
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यह 108 फीट ऊंची है, यानी लगभग 33 मीटर की ऊँचाई तक फैली हुई।
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प्रतिमा की सुनहरी चमक इसे दूर से भी बेहद आकर्षक बनाती है।
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भगवान नीलकंठ वर्णी तपस्या की मुद्रा में विराजमान हैं, जो आध्यात्मिक और दिव्य अनुभव को बढ़ाती है।
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यह मंदिर परिसर के मुख्य मार्ग और फ्लाईओवर से भी दिखाई देती है, जिससे आम लोग सड़क पर होते हुए भी इसकी भव्यता का आनंद ले सकते हैं।
नीलकंठ वर्णी की महत्वता
नीलकंठ वर्णी, जिन्हें महादेव या भगवान शिव के एक रूप के रूप में पूजा जाता है, हिंदू धर्म में शक्ति और तपस्या के प्रतीक हैं। उनका नीला कंठ पीड़ा और संकट का निवारण करने वाले रूप का प्रतीक माना जाता है। इस प्रतिमा के माध्यम से श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति और प्रेरणा प्राप्त कर सकते हैं।
मंदिर और पर्यटन के लिए महत्व
अक्षरधाम मंदिर ने हमेशा ही अपने भव्य और कलात्मक निर्माण के लिए दुनियाभर में प्रसिद्धि पाई है। इस नई प्रतिमा के स्थापित होने से:
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मंदिर परिसर की भव्यता और आकर्षण और बढ़ गया है।
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श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आध्यात्मिक अनुभव और भी गहरा हो गया है।
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यह प्रतिमा अब दिल्ली के नए लैंडमार्क के रूप में भी लोगों की यादों में शामिल हो जाएगी।
निष्कर्ष
अक्षरधाम मंदिर में स्थापित यह 108 फीट ऊंची नीलकंठ वर्णी प्रतिमा न केवल उसकी भव्यता और सोने जैसी चमक के लिए अद्भुत है, बल्कि यह आध्यात्मिक शक्ति और शहर की पहचान का भी प्रतीक बन चुकी है। दिल्ली में आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक इसे देखकर आध्यात्मिक आनंद के साथ-साथ शहर की नयी पहचान का हिस्सा भी महसूस करेंगे।
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