टाइप-5 डायबिटीज को अक्सर Malnutrition-Related Diabetes भी कहा जाता है। यह न तो पूरी तरह टाइप-1 जैसी है और न ही टाइप-2 जैसी। इसमें शरीर में इंसुलिन बनता तो है, लेकिन कुपोषण के कारण अग्न्याशय (Pancreas) पूरी तरह स्वस्थ नहीं रह पाता, जिससे इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं हो पाता। यह समस्या खासकर बचपन या किशोरावस्था में लंबे समय तक पर्याप्त पोषण न मिलने के कारण विकसित हो सकती है।
इस प्रकार की डायबिटीज अधिकतर कम और मध्यम आय वाले देशों में देखने को मिलती है, जहां गरीबी, भोजन की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव आम है। कमजोर शरीर, कम बॉडी मास इंडेक्स (BMI), थकान, बार-बार पेशाब आना, ज्यादा प्यास लगना और वजन का और कम होना इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। कई बार इसे गलत तरीके से टाइप-1 या टाइप-2 डायबिटीज मानकर इलाज शुरू कर दिया जाता है, जिससे मरीज को सही लाभ नहीं मिल पाता।
टाइप-5 डायबिटीज को हाल ही में इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (IDF) ने वर्ल्ड डायबिटीज कांग्रेस 2025 में आधिकारिक तौर पर मान्यता दी है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे इस बीमारी पर रिसर्च, सही डायग्नोसिस और बेहतर इलाज की संभावनाएं बढ़ेंगी।
इलाज की बात करें तो टाइप-5 डायबिटीज में केवल दवाइयां ही काफी नहीं होतीं। इसके लिए संतुलित और पोषक आहार, प्रोटीन और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की पूर्ति, साथ ही डॉक्टर की निगरानी में दवाओं का इस्तेमाल जरूरी होता है। कुछ मामलों में इंसुलिन की जरूरत भी पड़ सकती है, लेकिन डोज और तरीका अन्य प्रकार की डायबिटीज से अलग हो सकता है।
कुल मिलाकर, टाइप-5 डायबिटीज यह दिखाती है कि डायबिटीज केवल लाइफस्टाइल या ज्यादा खाने की बीमारी नहीं है, बल्कि गरीबी और कुपोषण भी इसके बड़े कारण बन सकते हैं। सही पहचान और समय पर इलाज से इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
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