विराट कोहली द्वारा अपना 52वां वनडे शतक पूरे करते ही क्रिकेट जगत में एक बार फिर तुलना की पुरानी बहस शुरू हो गई—क्या कोहली सच में सचिन तेंदुलकर से आगे निकल गए हैं? क्या वे वनडे क्रिकेट के अब तक के सबसे बड़े बल्लेबाज हैं? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सचिन के 51 शतक लंबे समय तक ऐसा मुकाम माने जाते थे, जिसे कोई छू भी नहीं पाएगा। लेकिन कोहली न केवल उस रिकॉर्ड के बराबर पहुंचे, बल्कि उसे पार भी कर गए, जिससे चर्चा और तेज हो गई।
पूर्व भारतीय कप्तान और महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर से जब इस विषय पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बिना किसी झिझक के अपनी राय रखी। गावस्कर ने माना कि विराट कोहली ने जिस तरह की निरंतरता, फिटनेस और मानसिक मजबूती के साथ वनडे क्रिकेट में प्रदर्शन किया है, वह उन्हें एक अलग स्तर का खिलाड़ी बनाती है। उन्होंने कहा कि किसी भी युग में ऐसा करना आसान नहीं होता, और कोहली ने ऐसे दौर में यह उपलब्धि हासिल की है जब प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं अधिक कठिन है।
सचिन तेंदुलकर की बात करें तो वे उस समय के बादशाह थे जब वनडे क्रिकेट में बड़े स्कोर उतने आम नहीं थे। फ्लैट पिचों, टी-20 के असर और भारी-भरकम बैट्स के दौर से पहले भी सचिन ने अपनी बल्लेबाजी से दुनिया को मंत्रमुग्ध किया। गावस्कर ने माना कि सचिन की उपलब्धियाँ हमेशा ऐतिहासिक रहेंगी और उन्हें कम नहीं आंका जा सकता। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि कोहली का चेज़ मास्टर बनना, दबाव में लगातार प्रदर्शन करना और बड़े टूर्नामेंटों में असरदार पारियां खेलना उन्हें विशिष्ट बनाता है।
गावस्कर के अनुसार, “तुलना करना भले कठिन हो, क्योंकि दोनों अलग-अलग युग के खिलाड़ी हैं, लेकिन यदि केवल वनडे प्रदर्शन और शतकों की बात करें तो कोहली का रिकॉर्ड उन्हें वनडे इतिहास का सबसे बड़ा बल्लेबाज मानने को मजबूर कर देता है।” उन्होंने कहा कि कोहली की फिटनेस और लगातार खेलने की भूख उन्हें आने वाले वर्षों में और भी बड़ी उपलब्धियों तक ले जा सकती है।
अंत में, गावस्कर ने यह भी स्पष्ट किया कि सचिन और कोहली दोनों ही भारतीय क्रिकेट की अनमोल धरोहर हैं, लेकिन वनडे के लिहाज से कोहली की निरंतरता और मैच फिनिश करने की क्षमता उन्हें बेहद खास बनाती है। यही कारण है कि क्रिकेट जगत का एक बड़ा हिस्सा अब उन्हें वनडे का ‘ग्रेटेस्ट’ मानने लगा है।
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