भारत में हाल ही में एक गंभीर साइबर सुरक्षा खतरा सामने आया है। ProxyEarth नाम की एक वेबसाइट कुछ समय के लिए लाइव हुई, जिसने मात्र फोन नंबर डालते ही किसी भी यूजर का नाम, पता और लाइव लोकेशन दिखाना शुरू कर दिया। इस चौंकाने वाली घटना ने देश के करोड़ों मोबाइल यूज़र्स की प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, वेबसाइट पर दिया गया इंटरफ़ेस बेहद आसान था—उपयोगकर्ता को सिर्फ एक मोबाइल नंबर टाइप करना होता था और कुछ ही सेकंड में वेबसाइट उस नंबर से जुड़ा नाम, पूरा पता, नेटवर्क जानकारी और यहां तक कि मैप पर लाइव लोकेशन भी दिखा देती थी। इस तरह की जानकारी बिना अनुमति सार्वजनिक होना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और इससे स्टॉकिंग, ठगी, जबरन वसूली और साइबर अपराध की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
यह घटना दिखाती है कि भारत में टेलीकॉम ग्राहकों का डेटा कितनी आसानी से लीक हो सकता है या गलत हाथों में जा सकता है। टेलीकॉम कंपनियों और डिजिटल सर्विस प्रदाताओं द्वारा एकत्र किया गया डेटा अत्यंत संवेदनशील होता है, और यदि ऐसे डेटा तक किसी तीसरी पार्टी की पहुंच हो जाती है, तो इसके परिणाम बेहद खतरनाक हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी वेबसाइटें या तो लीक हुए डेटाबेस पर निर्भर होती हैं या फिशिंग और अवैध एपीआई एक्सेस का उपयोग करती हैं। ProxyEarth की घटना ने टेलीकॉम रेगुलेटर्स और साइबर सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। शुरुआती रिपोर्ट्स के बाद वेबसाइट को हटाया जा चुका है, लेकिन इसने यह साफ कर दिया है कि भारत को डेटा सुरक्षा के मोर्चे पर और सख्त कदम उठाने होंगे।
साइबर विशेषज्ञों ने आम यूज़र्स को सतर्क रहने की सलाह दी है:
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मोबाइल नंबर से जुड़े ऐप्स में सीमित परमिशन दें
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अज्ञात लिंक, वेबसाइट और ऐप्स पर नंबर डालने से बचें
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नंबर को सार्वजनिक प्लेटफ़ॉर्म पर साझा न करें
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किसी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत साइबर सेल में शिकायत करें
ProxyEarth जैसी घटनाएं यह बताती हैं कि डिजिटल दुनिया में एक साधारण फोन नंबर भी आपकी निजी जिंदगी का दरवाज़ा खोल सकता है। इसलिए जागरूक रहना और डिजिटल प्राइवेसी की सुरक्षा करना अब हर यूज़र की जिम्मेदारी बन चुकी है
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