Mokshada Ekadashi 2025 Paran: सही विधि से करें मोक्षदा एकादशी का पारण, व्रत होगा पूर्ण और मिलेगा अपार पुण्य


 मोक्ष और पापों से मुक्ति प्रदान करने वाली मोक्षदा एकादशी वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक मानी जाती है। वर्ष 2025 में यह पावन व्रत 1 दिसंबर 2025 (सोमवार) को रखा गया है, जबकि पारण 2 दिसंबर 2025 (मंगलवार) को होगा। मान्यता है कि इस दिन सही विधि से पारण करने पर व्रत पूर्ण माना जाता है और साधक को अपार पुण्य की प्राप्ति होती है।

नीचे जानें—मोक्षदा एकादशी का पारण कैसे करें, क्या है शुभ समय और किन बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

मोक्षदा एकादशी 2025 पारण तिथि

  • पारण तिथि: 2 दिसंबर 2025

  • पारण का समय सूर्योदय के बाद से आरंभ होता है

  • पारण उसी दिन दोपहर से पहले कर लेना शुभ माना गया है

 मोक्षदा एकादशी पारण की सही विधि

1. प्रातःकाल स्नान और ध्यान

  • पारण के दिन सुबह जल्दी उठें

  • स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें

  • भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप और धूप जलाएं

2. भगवान विष्णु की पूजा

  • ओम नारायणाय नमः या ओम विष्णवे नमः मंत्र का जाप करें

  • तुलसी पत्र, पीले पुष्प, घी का दीपक अर्पित करें

  • गीता के कुछ अध्याय पढ़ना अत्यंत शुभ माना जाता है

3. पारण करने का सही तरीका

व्रत के दौरान भोजन नहीं किया जाता, इसलिए पारण का अर्थ है—उचित समय पर व्रत तोड़ना

  • पहले तुलसी जल या गंगाजल ग्रहण करें

  • इसके बाद फल, खीर, दूध या हल्का सात्त्विक भोजन करें

  • चावल या तामसिक भोजन तुरंत न लें

  • गृहस्थ लोग परंपरागत रूप से पहले ब्राह्मण या जरूरतमंदों को भोजन करवाकर पारण करते हैं

4. दान का महत्व

मोक्षदा एकादशी पर दान का विशिष्ट फल मिलता है।
पारण के दिन कर सकते हैं—

  • भोजन दान

  • वस्त्र दान

  • गौ-सेवा

  • जरूरतमंदों को अन्न या दक्षिणा

 मोक्षदा एकादशी क्यों है खास?

  • कहा जाता है कि इस व्रत से पूर्वजों के पापों का भी क्षय होता है

  • साधक को मोक्ष और पापों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है

  • भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं अर्जुन को एकादशी के महात्म्य का उपदेश दिया था

  • गीता जयंती भी इसी दिन मनाई जाती है

निष्कर्ष

मोक्षदा एकादशी का व्रत जब सही विधि और समय पर पारण किया जाता है, तो उसका फल कई गुना बढ़ जाता है। 2 दिसंबर की सुबह तुलसी जल से पारण कर भगवान विष्णु का स्मरण करें और दान-पुण्य करें। इससे व्रत पूर्ण माना जाएगा और साधक को मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ने का शुभ आशीर्वाद प्राप्त होगा।

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