देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो, जिसके पास 434 विमान और करीब 10,000 क्रू मेंबर्स हैं, इन दिनों गंभीर परिचालन संकट से गुजर रही है। भारत की कुल घरेलू उड़ानों में से लगभग 50% उड़ानों का संचालन करने वाली यह एयरलाइन अचानक बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द कर रही है, जिससे पूरे देश में यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। सवाल यह है कि इतना बड़ा बेड़ा और मजबूत टीम होने के बावजूद इंडिगो की सेवाएँ क्यों लड़खड़ा गईं?
दरअसल, हाल ही में डीजीसीए (DGCA) ने पायलटों के लिए नए फैटीग मैनेजमेंट (Fatigue Management) और ड्यूटी-रेस्ट नियम लागू किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य उड़ान सुरक्षा बढ़ाना है, लेकिन इसका सबसे बड़ा असर इंडिगो के संचालन पर पड़ा है। नए नियमों के चलते एयरलाइन को अपने पायलट रोस्टर में बड़े बदलाव करने पड़े, जिसके कारण अचानक क्रू की उपलब्धता प्रभावित हुई। इसका सीधा असर उड़ान संचालन पर देखा गया और कई रूटों पर सेवाएँ बाधित हो गईं।
सबसे ज्यादा समस्या मेट्रो शहरों में देखने को मिली है। बंगलूरू एयरपोर्ट पर सबसे अधिक उड़ानें रद्द हुईं, जिससे हजारों यात्री फंस गए। वहीं दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े केंद्रों पर भी लगातार उड़ानें रद्द होने से यात्रियों को लंबा इंतजार, रीबुकिंग की दिक्कत और यात्रा योजनाओं में बदलाव झेलना पड़ा। एयरलाइन के मुताबिक, रोस्टर तैयार करते समय पायलटों के विश्राम समय का पालन करना अनिवार्य हो गया है, इसलिए कई फ्लाइट्स एक साथ प्रभावित हो गईं।
इंडिगो के क्रू और पायलट संगठनों का कहना है कि एयरलाइन इतने बड़े बेड़े के बावजूद पर्याप्त बैकअप प्लान तैयार नहीं कर पाई। अचानक लागू हुए नियमों से पहले यदि इंडिगो ने पर्याप्त अतिरिक्त क्रू, फ्लाइट प्लानिंग और इमरजेंसी शिफ्ट संरचना बनाने पर ध्यान दिया होता, तो हालात इतने खराब नहीं होते। वहीं यात्रियों ने सोशल मीडिया पर शिकायत की है कि उन्हें अंतिम क्षण में रद्दीकरण की जानकारी मिली, जिससे वैकल्पिक यात्रा की व्यवस्था करना बेहद मुश्किल हो गया।
इस बीच इंडिगो ने यात्रियों से माफी मांगते हुए कहा है कि स्थिति को जल्द सामान्य किया जा रहा है और रिफंड तथा रीबुकिंग विकल्प तेजी से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। लेकिन एयरलाइन ने यह चेतावनी भी दी है कि संचालन पूरी तरह पटरी पर आने में कुछ दिन और लग सकते हैं।
फिलहाल यह संकट यह बताता है कि किसी भी एयरलाइन के लिए बड़ा बेड़ा और विशाल स्टाफ होना पर्याप्त नहीं है—उचित प्लानिंग, समय पर रोस्टरिंग और क्रू मैनेजमेंट ही वास्तविक परिचालन क्षमता तय करते हैं।
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