Enzyme Replacement Therapy (ERT) India:
लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर (Lysosomal Storage Disorder–LSD) एक दुर्लभ लेकिन बेहद गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जो अधिकतर छोटे बच्चों को प्रभावित करती है। यह बीमारी शरीर में मौजूद लाइसोसोम नामक कोशिकीय संरचना में एंजाइम की कमी के कारण होती है, जिसकी वजह से हानिकारक पदार्थ शरीर में जमा होने लगते हैं और धीरे-धीरे कई अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं।
क्या होता है लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर?
इस बीमारी में बच्चे का शरीर कुछ खास एंजाइम नहीं बना पाता। इसकी वजह से—
लिवर
किडनी
हड्डियाँ
मस्तिष्क
मांसपेशियां
धीरे-धीरे प्रभावित होने लगते हैं। यदि समय पर उपचार न मिले, तो यह बीमारी जानलेवा रूप ले सकती है।
इसका इलाज इतना महंगा क्यों है?
LSD का इलाज मुख्य रूप से Enzyme Replacement Therapy (ERT) के जरिए किया जाता है। यह थेरेपी बेहद महंगी होती है और पूरे साल इलाज का खर्च लाखों-करोड़ों में पहुंच जाता है।
भारत में वर्तमान में ERT के लिए 50 लाख रुपये की सीमा तय है, लेकिन कई मरीजों का कहना है कि यह राशि पर्याप्त नहीं है।
इसी को देखते हुए IMPF (Indian Patients’ Medical Forum) ने सरकार को पत्र लिखकर इलाज की सीमा बढ़ाने की मांग की है, ताकि अधिक बच्चों को समय पर और पूरा उपचार मिल सके।
क्यों बढ़ रहा है खतरा?
इलाज बहुत महंगा
कई राज्यों में थेरेपी उपलब्ध नहीं
समय पर डायग्नोसिस नहीं हो पाना
जीवनभर इलाज की जरूरत
सरकारी सहायता सीमित
इन कारणों से देश में दर्जनों बच्चे समय पर इलाज न मिलने की वजह से गंभीर स्थिति में पहुंच रहे हैं।
क्या है समाधान?
विशेषज्ञ मानते हैं कि—
इलाज की लागत बढ़ाना
सरकारी योजनाओं में कवर बढ़ाना
शुरुआती स्क्रीनिंग
प्रत्येक राज्य में ERT सेंटर
परिवारों को वित्तीय सहायता
जैसे कदम उठाए जाएं तो बच्चों को बेहतर जीवन मिल सकता है।
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