Conflict: रूस का कीव पर भीषण मिसाइल और ड्रोन हमला, कई शहरों में बिजली ठप; ट्रंप–जेलेंस्की बैठक से पहले बढ़ा तनाव


 यूक्रेन की राजधानी कीव पर 27 दिसंबर को रूस ने बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया, जिससे पूरे शहर में दहशत का माहौल बन गया। इस हमले को हाल के महीनों में सबसे गंभीर हमलों में से एक माना जा रहा है। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, रूस ने एक साथ कई अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया, जिनमें किंजल (Kinzhal) हाइपरसोनिक मिसाइल, इस्कैंडर बैलिस्टिक मिसाइल और कालिब्र क्रूज मिसाइलें शामिल थीं। इसके अलावा बड़ी संख्या में ड्रोन भी दागे गए।

हमले के दौरान कीव और उसके आसपास के इलाकों में कई जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। राजधानी से सटे ब्रावरी शहर में बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई, जबकि अन्य क्षेत्रों में भी ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबर है। यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है, लेकिन इसके बावजूद कुछ हमले अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे।

यूक्रेनी प्रशासन ने बताया कि इस हमले का मुख्य निशाना ऊर्जा ढांचा और सैन्य ठिकाने थे, हालांकि नागरिक इलाकों को भी नुकसान पहुंचा है। राहत और बचाव दल तुरंत प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किए गए हैं और बिजली बहाल करने के प्रयास जारी हैं। फिलहाल हताहतों की सटीक संख्या को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन कई लोगों के घायल होने की आशंका जताई जा रही है।

यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के बीच प्रस्तावित बैठक से पहले हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। माना जा रहा है कि यह हमला रूस की रणनीतिक ताकत दिखाने और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाइपरसोनिक और बैलिस्टिक मिसाइलों का एक साथ इस्तेमाल रूस की सैन्य क्षमता और संदेश देने की रणनीति को दर्शाता है। वहीं यूक्रेन ने अपने सहयोगी देशों से वायु रक्षा प्रणालियों और सैन्य सहायता को और मजबूत करने की अपील दोहराई है।

कुल मिलाकर, कीव पर हुआ यह हमला न केवल यूक्रेन के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और कूटनीतिक प्रयास इस संघर्ष की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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