भारत दौरे पर पुतिन: पीएम मोदी के साथ रात्रिभोज से लेकर राजघाट तक — दो दिनों में क्या-क्या करेंगे रूसी राष्ट्रपति?


महेश शर्मा 
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज अपनी बहुप्रतीक्षित दो दिवसीय भारत यात्रा पर पहुंच रहे हैं। यह दौरा रणनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत–रूस संबंध दशकों पुराने हैं, और ऐसे समय में जब वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है, पुतिन की यह यात्रा दोनों देशों के बीच साझेदारी को नए मुकाम तक ले जाने वाली मानी जा रही है। पुतिन का कार्यक्रम बेहद व्यस्त है और वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ औपचारिक और अनौपचारिक दोनों तरह की बैठकों में शामिल होंगे। आइए जानते हैं उनके इस दौरे का पूरा एजेंडा।

पुतिन के भारत आने के तुरंत बाद उनका स्वागत उच्च-स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल द्वारा किया जाएगा। इसके बाद पुतिन का पहला प्रमुख कार्यक्रम होगा राजघाट का दौरा, जहां वे महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। हर बड़े राष्ट्राध्यक्ष के दौरे की तरह यह भी एक महत्वपूर्ण सांकेतिक कदम है, जो भारत के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

इसके बाद उनका मुख्य कार्यक्रम होगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता। यह मुलाकात बेहद अहम होगी क्योंकि इसमें रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार विस्तार, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत होने वाली है। दोनों देश ब्रह्मोस, सैन्य उपकरणों की संयुक्त उत्पादन परियोजनाओं और चाबहार पोर्ट जैसे प्रमुख प्रोजेक्ट्स पर भी चर्चा कर सकते हैं। यूक्रेन संकट, वैश्विक तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी बातचीत होने की संभावना है।

शाम के समय पीएम मोदी पुतिन के सम्मान में औपचारिक रात्रिभोज (State Dinner) का आयोजन करेंगे। यह बैठक निजी और अनौपचारिक बातचीत का अवसर प्रदान करती है, जहां दोनों नेता रणनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में चर्चा कर सकते हैं।

दौरे के दूसरे दिन पुतिन भारतीय उद्योगपतियों, व्यापारिक नेताओं और टेक सेक्टर से जुड़े प्रतिनिधियों से मिलेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक और टेक्नोलॉजी साझेदारी को बढ़ाने पर फोकस होगा। साथ ही कुछ महत्वपूर्ण समझौतों और MoUs पर भी हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इनमें ऊर्जा सहयोग, कृषि व्यापार, शैक्षणिक आदान-प्रदान और नई तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी शामिल हो सकती है।

पुतिन की यह यात्रा संकेत देती है कि भारत और रूस अपने द्विपक्षीय संबंधों को वैश्विक परिवर्तनों के अनुरूप आगे बढ़ाना चाहते हैं। अगले 48 घंटों में होने वाली चर्चाएँ और समझौते दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दे सकते हैं

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं )

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