महेश शर्मा
हथियारों की आपूर्ति और संयुक्त उत्पादन भी एजेंडे का खास हिस्सा हो सकता है।
एस-400 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी और कार्यक्रम की समीक्षा भी सम्भव है। जेट इंजन का संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग, जो 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत आता है।
Su-57 जैसे 5वीं (फिफ्थ जेनरेशन) पीढ़ी के लड़ाकू विमानों और S-500 डिफेंस सिस्टम की खरीद पर चर्चा हो सकती है। रक्षा उपकरणों के सीधे आपूर्ति अनुबंधों से आगे बढ़कर दीर्घकालिक तकनीकी साझेदारियों पर जोर देना भी सम्भव हो सकता है।
अमेरिकी प्रतिबंधों और डॉलर पर निर्भरता को कम करने के लिए एक वैकल्पिक वैश्विक भुगतान प्रणाली का विकास करना विचार बिंदु सम्भव है।।
दोनों देशों के बीच व्यापार और आयात को लेकर विस्तृत चर्चा, जिसमें भारतीय निर्यात (जैसे मशीनरी, दवा, रसायन) को रूसी बाजार तक अधिक पहुंच दिलाना शामिल है।
कच्चे तेल की दीर्घकालिक आपूर्ति व्यवस्था, परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण और आर्कटिक एलएनजी जैसी रूसी ऊर्जा परियोजनाओं में भारतीय निवेश पर बातचीत भी हो सकती है। बदलते वैश्विक समीकरणों, खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों के दबाव के सामने, भारत के साथ अपनी 'विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' को और मजबूत करना भी रूस और भारत के बीच बातचीत का हिस्सा हो सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत के साथ खुला रणनीतिक संवाद बनाए रखने पर चर्चा, क्योंकि भारत इस मुद्दे पर अडिग रहा है।
रूस द्वारा 10 लाख भारतीयों की भर्ती की इच्छा पर चर्चा (यह एक नए मोर्चे के रूप में उभरा है)। तथा आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग को और मजबूत करना भी शामिल हो सकता है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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