देश में तेजी से बढ़ रहा न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा: हर तीसरा परिवार किसी न किसी मस्तिष्क रोग से प्रभावित


 भारत में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों की बढ़ती रफ्तार गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। डब्ल्यूएचओ की ‘ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट ऑन न्यूरोलॉजी 2025’ के ताज़ा आंकड़े इस दिशा में बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन दशकों में देश में मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों का बोझ लगभग दोगुना बढ़ गया है। इसका मतलब है कि न्यूरोलॉजिकल विकार अब भारत की आबादी के एक बड़े हिस्से को प्रभावित कर रहे हैं और यह समस्या लगातार गहराती जा रही है।

हर तीसरा परिवार किसी न किसी मस्तिष्क रोग से प्रभावित

रिपोर्ट में सामने आया है कि भारत में हर तीसरा परिवार किसी न किसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझ रहा है। ये बीमारियां उम्र, पर्यावरण, लाइफस्टाइल और जेनेटिक फैक्टर्स के आधार पर अलग-अलग तरह से सामने आती हैं। इनमें स्ट्रोक, मिर्गी, पार्किंसन, अल्ज़ाइमर, न्यूरोपैथी जैसे कई विकार शामिल हैं। बढ़ती उम्र, तनाव, नींद की कमी, गलत खानपान और प्रदूषण जैसी वजहें भी इन बीमारियों की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

स्ट्रोक के मामलों में विस्फोटक वृद्धि

रिपोर्ट के सबसे चौंकाने वाले आंकड़ों में एक यह है कि भारत में हर साल लगभग 25 लाख लोग स्ट्रोक का शिकार हो रहे हैं। यह संख्या दुनिया के कई विकसित देशों की तुलना में बेहद ज्यादा है। स्ट्रोक का बढ़ना न सिर्फ चिकित्सा प्रणाली पर दबाव बढ़ा रहा है, बल्कि परिवारों पर आर्थिक और भावनात्मक बोझ भी बढ़ा रहा है। कई मरीज लंबे समय तक इलाज और पुनर्वास पर निर्भर रहते हैं, जिससे उनकी जीवनशैली पूरी तरह बदल जाती है।

नींद के विकार और मानसिक तनाव भी बड़ी वजह

आज की तेज़-तर्रार जीवनशैली में लोग नींद संबंधी विकारों, अवसाद, एंग्जाइटी और तनाव से अधिक प्रभावित हो रहे हैं। यह सभी समस्याएं आगे जाकर मस्तिष्क पर प्रतिकूल असर डालती हैं और न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का जोखिम बढ़ाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार तनाव मस्तिष्क की कोशिकाओं को कमजोर करता है और समय के साथ गंभीर स्थितियां पैदा कर सकता है।

रोकथाम और जागरूकता की आवश्यकता

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत को न्यूरोलॉजिकल बीमारियों पर तुरंत प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। नियमित हेल्थ चेक-अप, स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों की पहचान, संतुलित जीवनशैली, तनाव प्रबंधन, सही खानपान और पर्याप्त नींद जैसे उपाय इन बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।

निष्कर्ष

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट भारत के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। बढ़ते न्यूरोलॉजिकल मामलों को नजरअंदाज करना आने वाले समय में बड़े स्वास्थ्य संकट को जन्म दे सकता है। समय पर पहचान, बेहतर स्वास्थ्य ढांचा और जागरूकता ही इस चुनौती से निपटने का सबसे प्रभावी मार्ग हैं।

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