स्वास्थ्य: कोविड के बाद भी बनी रहने वाली समस्याओं के पीछे छुपी बीमारियां जिम्मेदार, वैज्ञानिकों का बड़ा खुलासा


 कोविड-19 से ठीक होने के बाद भी बड़ी संख्या में लोग लंबे समय तक थकान, सांस की दिक्कत, दिमागी धुंध (ब्रेन फॉग), मांसपेशियों में दर्द और बार-बार बीमार पड़ने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। अब माइक्रोबायोलॉजी के 17 वरिष्ठ वैज्ञानिकों के एक समूह ने इस पर अहम जानकारी साझा की है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन समस्याओं के पीछे सिर्फ कोरोना वायरस ही नहीं, बल्कि शरीर में पहले से मौजूद छुपी बीमारियां और संक्रमण भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

कोविड कैसे कमजोर करता है इम्यून सिस्टम?

वैज्ञानिकों के अनुसार, कोविड-19 संक्रमण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को गहराई से प्रभावित करता है। संक्रमण के दौरान और उसके बाद इम्यून सिस्टम संतुलन खो सकता है। इसका असर यह होता है कि शरीर पहले से मौजूद लेकिन निष्क्रिय (डॉर्मेंट) संक्रमणों को दबाए रखने में कमजोर पड़ जाता है।

कौन-सी छुपी बीमारियां हो सकती हैं सक्रिय?

रिपोर्ट में बताया गया है कि कई लोगों के शरीर में कुछ वायरस, बैक्टीरिया या अन्य संक्रमण सालों तक शांत अवस्था में मौजूद रहते हैं और सामान्य स्थिति में नुकसान नहीं पहुंचाते। लेकिन कोविड के बाद इम्यून सिस्टम कमजोर होने पर ये संक्रमण दोबारा सक्रिय हो सकते हैं। यही दोबारा सक्रिय हुए संक्रमण आगे चलकर लॉन्ग कोविड जैसे लक्षणों को जन्म दे सकते हैं।

लॉन्ग कोविड के लक्षण क्यों रहते हैं लंबे समय तक?

वैज्ञानिकों का कहना है कि जब छुपे हुए संक्रमण दोबारा सक्रिय होते हैं, तो शरीर लगातार उनसे लड़ता रहता है। इस कारण सूजन बनी रहती है और मरीज को लंबे समय तक थकावट, कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं महसूस होती हैं। कई मामलों में मरीज को यह समझ ही नहीं आता कि कोविड ठीक होने के बाद भी तबीयत क्यों नहीं संभल रही है।

इलाज और जांच के लिए क्या है संकेत?

विशेषज्ञों का मानना है कि लॉन्ग कोविड के मरीजों में सिर्फ कोरोना से जुड़ी जांच ही नहीं, बल्कि पहले से मौजूद संक्रमणों की पहचान भी जरूरी हो सकती है। इससे सही कारण तक पहुंचना और बेहतर इलाज संभव हो सकेगा।

आम लोगों के लिए क्या संदेश?

वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि कोविड से ठीक होने के बाद अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक स्वास्थ्य समस्याएं बनी रहती हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर डॉक्टर से सलाह, नियमित जांच और इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने वाली जीवनशैली बेहद जरूरी है।

कुल मिलाकर, यह शोध बताता है कि कोविड के बाद की समस्याएं सिर्फ वायरस का असर नहीं, बल्कि शरीर के भीतर छुपी बीमारियों के दोबारा सक्रिय होने का नतीजा भी हो सकती हैं।

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