Amavasya 2026: कब है अमावस्या? ज्योतिषाचार्या से जानें तिथि, महत्व और पितृ दोष से मुक्ति के उपाय


 Amavasya 2026: हिंदू पंचांग में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन चंद्रमा पूरी तरह लुप्त होता है, जिसे नई ऊर्जा, आत्मचिंतन और पितरों को तृप्त करने का सर्वोत्तम समय कहा गया है। ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा के अनुसार, अमावस्या तिथि न सिर्फ मन को स्थिर करने का अवसर देती है, बल्कि पितरों की कृपा प्राप्त करने और पितृ दोष से मुक्ति का महत्वपूर्ण दिन भी है।

2026 में अमावस्या कब-कब पड़ेगी?

नीचे वर्ष 2026 की सभी अमावस्या तिथियों का विवरण दिया गया है:

  • 22 जनवरी 2026 – माघ अमावस्या

  • 20 फरवरी 2026 – फाल्गुन अमावस्या

  • 20 मार्च 2026 – चैत्र अमावस्या

  • 18 अप्रैल 2026 – वैशाख अमावस्या

  • 18 मई 2026 – ज्येष्ठ अमावस्या

  • 16 जून 2026 – आषाढ़ अमावस्या

  • 16 जुलाई 2026 – सावन अमावस्या

  • 14 अगस्त 2026 – भाद्रपद अमावस्या

  • 13 सितंबर 2026 – आश्विन अमावस्या (महालय अमावस्या)

  • 12 अक्टूबर 2026 – कार्तिक अमावस्या (दीपावली)

  • 11 नवंबर 2026 – मार्गशीर्ष अमावस्या

  • 10 दिसंबर 2026 – पौष अमावस्या

ये सभी तिथियां पितृ तर्पण, पूजा-पाठ और नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती हैं।

अमावस्या का महत्व

ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा बताती हैं कि अमावस्या दिन आध्यात्मिक साधना और मानसिक शांति के लिए अत्यंत प्रभावी है। इस दिन किए गए दान-पुण्य, जप-तप और ध्यान का फल कई गुना बढ़ जाता है।

  • यह दिन नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने,

  • घर-परिवार में सुख-शांति लाने,

  • और पितरों के आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष माना जाता है।

महालय अमावस्या (सितंबर) वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण अमावस्या होती है, जब पितरों का श्राद्ध और तर्पण विशेष रूप से किया जाता है।

पितृ दोष से मुक्ति के उपाय

यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष हो, तो अमावस्या का दिन विशेष फलदायी माना जाता है। नीतिका शर्मा के अनुसार, निम्न उपाय करने से पितृ दोष कम होता है और पितरों की कृपा मिलती है:

1. पितृ तर्पण और पिंड दान करें

जल, तिल, जौ और कुशा से तर्पण करने से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार में शांति आती है।

2. अपने पितरों का स्मरण और दीपदान करें

शाम के समय घर के बाहर या पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना बेहद शुभ माना गया है।

3. गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन कराएं

अमावस्या को भोजन दान या अन्न दान पितरों की तुष्टि का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है।

4. पीपल वृक्ष की पूजा करें

पीपल को पितरों का प्रतीक माना जाता है। इसकी परिक्रमा और पूजा करने से पितृ दोष के प्रभाव कम होते हैं।

5. मंत्र जाप करें

“ॐ पितृदेवताभ्यो नमः” का 108 बार जाप करने से विशेष लाभ मिलता है।

निष्कर्ष

अमावस्या तिथि आध्यात्मिक शुद्धि, पितृ कार्य और मानसिक सुकून का दिन है। 2026 में आने वाली सभी अमावस्याएं अपने-अपने महत्व के साथ शुभ अवसर प्रदान करती हैं। सही विधि से पूजा और तर्पण करने पर पितरों का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

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