World COPD Day 2025: दिल्ली का बढ़ता प्रदूषण बना रहा है फेफड़ों के लिए खतरा, बढ़ रहा है COPD का जोखिम


 हर साल नवंबर के तीसरे बुधवार को वर्ल्ड COPD डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को Chronic Obstructive Pulmonary Disease यानी सीओपीडी के खतरों और रोकथाम के तरीकों के बारे में जागरूक करना है। लेकिन इस वर्ष दिल्ली की स्थिति पहले से कहीं ज्यादा चिंताजनक है। राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार 400+ बना हुआ है, जो ‘सीवियर’ श्रेणी में आता है। ऐसी जहरीली हवा सीधे तौर पर फेफड़ों पर हमला करती है और धीरे-धीरे COPD जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ाती है।

दिल्ली में हर घंटे हजारों लोग इस जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं। प्रदूषण का स्तर इतना ज्यादा है कि स्वस्थ व्यक्ति को भी सांस लेने में तकलीफ महसूस हो सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार ऐसे वातावरण में रहने से फेफड़ों की क्षमता कम होने लगती है। स्मॉग, पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे तत्व फेफड़ों के ऊत्तकों में सूजन पैदा करते हैं। यही सूजन लंबे समय में COPD की शुरुआत बन जाती है।

सीओपीडी एक ऐसी बीमारी है जिसमें फेफड़ों की हवा आने-जाने की क्षमता कमजोर हो जाती है। शुरुआत में हल्की खांसी, बलगम और हल्का सांस फूलना जैसे लक्षण नजर आते हैं, लेकिन समय रहते ध्यान न देने पर ये लक्षण गंभीर रूप ले लेते हैं। खासकर बुजुर्गों, बच्चों, अस्थमा के मरीजों और धूम्रपान करने वालों को इसका जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। दिल्ली में जहां प्रदूषण रोज नई ऊंचाइयों को छू रहा है, वहां ये समूह सीओपीडी के लिए सबसे अधिक संवेदनशील हैं।

डॉक्टर्स का कहना है कि स्मॉग के महीनों में अस्पतालों में सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या 30–40% तक बढ़ जाती है। कई मरीजों को लगातार खांसी, सीने में जकड़न और सांस लेने में भारीपन की शिकायत रहती है। अगर समय पर इलाज न मिले तो ये समस्या स्थायी फेफड़ों की क्षति में बदल सकती है। यही वजह है कि इस विश्व COPD दिवस पर विशेषज्ञों ने लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण के दिनों में बाहर जाते समय N95 मास्क पहनना, सुबह-शाम बाहर की गतिविधियों को कम करना, घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का उपयोग करना और पानी का पर्याप्त सेवन करना जरूरी है। जिन लोगों को पहले से फेफड़ों की समस्या है, उन्हें नियमित चेकअप कराने और किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करने की सलाह दी जाती है।

कुल मिलाकर, दिल्ली का बिगड़ता प्रदूषण अब सिर्फ एक पर्यावरणीय समस्या नहीं रहा—यह लोगों की फेफड़ों की सेहत के लिए गंभीर चेतावनी बन चुका है। इस वर्ल्ड COPD डे पर जरूरी है कि हर व्यक्ति जागरूक हो, सावधानी बरते और अपने फेफड़ों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे

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