अमेरिका में गैर-अप्रवासी वीजा (Non-Immigrant Visas) को लेकर ट्रंप प्रशासन ने अपने दूसरे कार्यकाल में और अधिक कठोर रुख अपना लिया है। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, अब सिर्फ अप्रवासियों पर ही नहीं बल्कि टूरिस्ट, बिजनेस ट्रिप पर आने वाले यात्रियों और स्टूडेंट्स तक पर कड़ा एक्शन लिया जा रहा है। इस फैसले के चलते हजारों लोग यात्रा योजनाएं बदलने को मजबूर हो गए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने सिर्फ 10 महीनों में करीब 80,000 वीजा रद्द कर दिए हैं। यह आंकड़ा वीजा नीतियों में बढ़ती सख्ती को दर्शाता है। यह रद्दीकरण केवल वीजा एक्सपायरी या दस्तावेज़ी कमियों की वजह से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अवैध प्रवास को रोकने के नाम पर किया जा रहा है।
किन वीजाओं पर सबसे ज्यादा असर?
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Tourist Visa (B1/B2)
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Business Visa
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Student Visa
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Temporary Work Visa
कई यात्रियों को एयरपोर्ट पर ही वापस लौटा दिया गया, जबकि कुछ मामलों में पहले जारी किए गए वीजा को भी अचानक रद्द कर दिया गया। यही नहीं, कुछ लोगों को निर्वासन (Deportation) की कार्रवाई का भी सामना करना पड़ा।
ट्रंप प्रशासन का तर्क
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अवैध तरीके से अमेरिका में रुकने वालों पर नियंत्रण
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वीजा की आड़ में होने वाले रोजगार और ठगी पर रोक
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राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना
ट्रंप प्रशासन लगातार कह रहा है कि “वीज़ा एक सुविधा है, अधिकार नहीं।” उनका मानना है कि गलत प्रवृत्ति के लोगों को देश में कदम रखने का भी मौका नहीं मिलना चाहिए।
विशेषज्ञों की राय
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यह नीति उन सच्चे टूरिस्ट और बिजनेस विज़िटर्स को नुकसान पहुंचा रही है
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IT और सर्विस सेक्टर से जुड़े भारतीयों पर भी प्रभाव पड़ रहा है
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अमेरिका की वैश्विक छवि एक “Restrictive Nation” के रूप में उभर रही है
इस सख्ती के चलते सबसे बड़ा झटका उन लोगों को लगा है जो शॉर्ट-टर्म बिजनेस मीटिंग, कॉन्फ्रेंस या मेडिकल विज़िट के लिए अमेरिका जाने की तैयारी में थे। कई कंपनियों ने भी चिंता जताई है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, ट्रंप प्रशासन की यह नीति अमेरिकी वीज़ा को न सिर्फ और कठिन बना रही है बल्कि दुनियाभर से आने वाले यात्रियों में अनिश्चितता और भय भी पैदा कर रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में यह सख्ती और बढ़ सकती है, जो अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल और बिजनेस मूवमेंट पर सीधे असर डालेगी।
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