अमेरिका में स्टारबक्स एक बार फिर बड़े विवाद के केंद्र में है। वार्षिक Red Cup Day से ठीक पहले कर्मचारियों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। न्यूयॉर्क के लोकप्रिय भारतीय-अमेरिकी विधायक जोहरान ममदानी ने खुलकर स्टारबक्स के बहिष्कार की अपील करते हुए कहा है—“No Contract, No Coffee”। उनकी इस अपील ने मामले को और गर्मा दिया है और सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
स्टारबक्स के हजारों कर्मचारी बीते कई महीनों से बेहतर वेतन, समय पर शेड्यूल, और सुरक्षित कार्य वातावरण की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों के अनुसार, कंपनी यूनियन से बातचीत में सहयोग नहीं कर रही और अनुबंध (Contract) को लेकर खींचतान जारी है। इसी के विरोध में स्टारबक्स कर्मचारियों ने Red Cup Rebellion नामक आंदोलन शुरू किया है, जिसके तहत वे कंपनी के सबसे व्यस्त दिनों में काम बंद कर हड़ताल करते हैं।
रेड कप डे क्यों है खास?
Red Cup Day स्टारबक्स का प्रमोशनल इवेंट है, जब लाखों ग्राहक मुफ्त रेड कप पाने के लिए स्टोर्स में पहुंचते हैं। यह कंपनी के लिए साल का सबसे व्यस्त और कमाई वाला दिन होता है। ऐसे में कर्मचारियों की हड़ताल का असर सीधा कंपनी की आय और ब्रांड इमेज पर पड़ता है।
जोहरान ममदानी की भूमिका
जोहरान ममदानी लंबे समय से श्रमिक अधिकारों के समर्थक रहे हैं। उन्होंने स्टारबक्स कर्मचारियों को समर्थन देते हुए बहिष्कार की अपील की और कहा कि जब तक कर्मचारियों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक लोगों को स्टारबक्स से दूरी बनानी चाहिए। उनकी अपील के बाद आंदोलन को राजनीतिक और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर बड़ा समर्थन मिलता दिख रहा है।
क्यों बढ़ रहा है विवाद?
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कर्मचारी—सुरक्षित और न्यायसंगत कामकाज के माहौल की मांग पर अड़े
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कंपनी—यूनियन बातचीत की प्रक्रिया को धीमी बताने का आरोप झेल रही
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राजनीतिक समर्थन—ममदानी समेत कई नेताओं ने खुले तौर पर कर्मचारियों का पक्ष लिया
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सोशल मीडिया—#NoContractNoCoffee और #RedCupRebellion ट्रेंड कर रहे
श्रमिक अधिकारों की बड़ी बहस
यह विवाद केवल स्टारबक्स तक सीमित नहीं है। अमेरिका में कई कंपनियों के कर्मचारी बेहतर अनुबंध, लाभ और कार्य परिस्थितियों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। बड़े कॉरपोरेट ब्रांड्स के खिलाफ बढ़ती यूनियन मांगों ने श्रमिक अधिकारों की राष्ट्रीय बहस को तेज कर दिया है।
रेड कप डे के नजदीक आते ही यह संघर्ष और गहरा हो गया है। अब नजरें इस बात पर हैं कि क्या कंपनी और कर्मचारी किसी समझौते पर पहुंचेंगे या यह विवाद और लंबा चलेगा।
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