US News: ट्रंप फिर चर्चा में—भारत-पाक संघर्ष पर लिया श्रेय, विमानों को गिराने के दावे लगातार बढ़े


 अमेरिकी राजनीति में अक्सर विवादित बयानों से सुर्खियां बटोरने वाले पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के तनाव को लेकर अपने पुराने दावों को दोहराया है। ट्रंप ने कहा है कि मई से अब तक वह 60 से अधिक बार इस बात का जिक्र कर चुके हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित संघर्ष को उन्होंने अपने टैरिफ दबाव और बातचीत के जरिये रोका। यही नहीं, उन्होंने विमानों को मार गिराने को लेकर भी नए आंकड़े पेश कर दिए हैं।

ट्रंप के अनुसार, जुलाई में उन्होंने पहले पांच, फिर बयान बदलकर सात विमानों को मार गिराने की बात कही थी और अब उनका दावा है कि कुल आठ विमान गिराए गए। यह स्पष्ट नहीं है कि वह किन विमानों की बात कर रहे हैं और इस घटना का भारत-पाक संघर्ष से क्या संबंध है। उनकी इन लगातार बदलती बातों पर अब सवाल उठने लगे हैं।

गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच फरवरी 2019 में बालाकोट एयरस्ट्राइक और उसके बाद हवाई संघर्ष के दौरान एक-दूसरे के फाइटर जेट गिराने की घटना सामने आई थी। भारत ने उस समय पाकिस्तान का F-16 विमान गिराने का दावा किया था, जबकि पाकिस्तान ने भारत के एक मिग-21 को निशाना बनाया था।
हालांकि इस पूरे विवाद में अमेरिका किसी भी प्रकार की सीधी मध्यस्थता में शामिल नहीं था

भारत ने हमेशा यह स्पष्ट रुख रखा है कि
कश्मीर और शांति से जुड़े मुद्दे भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय हैं, और किसी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं है।

इसके बावजूद ट्रंप समय-समय पर यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने ही दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम किया। विशेषज्ञों का मानना है कि 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी के चलते ट्रंप लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं, जिनसे वह अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपनी भूमिका को बड़ा दिखा सकें।

कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार,

  • ट्रंप के दावों का कोई आधिकारिक समर्थन या प्रमाण मौजूद नहीं

  • भारत बार-बार मध्यस्थता से इनकार कर चुका है

  • विमानों की संख्या बदलते रहने ने उनके बयान की विश्वसनीयता पर और सवाल खड़े किए हैं

फिलहाल, भारत की ओर से ट्रंप के नए दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। लेकिन यह तय है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति के ये बयान एक बार फिर राजनयिक हलकों में बहस को जन्म दे रहे हैं—और शायद आगे भी देते रहेंगे।

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