पिछले कुछ महीनों में UP में कई जिलों में बड़ी मात्रा में फर्जी और प्रतिबंधित दवाएं जब्त की गईं, जिससे स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कुछ मेडिकल दुकानों ने लाइसेंस रद्द या सरेंडर कर दिया, लेकिन फिर भी पीछे से बगैर रजिस्ट्रेशन और बिना डॉक्यूमेंट्स के दवाओं की खरीद-फरोख्त जारी रखी।
नकली दवाओं का काला कारोबार कैसे चलता है?
जांच रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
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लाइसेंस सरेंडर करने वाले दुकान मालिक बिना बिल के सस्ते और नकली प्रोडक्ट खरीदते हैं
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दवाएं छोटे पैकेटों में या लोकल मार्केट में सप्लाई की जाती हैं
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कई बार एक्सपायर दवाओं को री-लेबल कर फिर से बेचा जाता है
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बिना योग्य फार्मासिस्ट के गांवों और कस्बों में अवैध मेडिकल सेंटर संचालित किए जाते हैं
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कुछ लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी ड्रग्स की डिलीवरी करते हैं
स्वास्थ्य विभाग मानता है कि इन सबके पीछे सक्रिय नेटवर्क न केवल कानून को चकमा देता है, बल्कि आम लोगों की जान से खिलवाड़ भी करता है।
सरकार की सख्त कार्रवाई
UP ड्रग कंट्रोल विभाग ने अब ऐसे लोगों की लिस्ट तैयार कर ली है। जिन मेडिकल स्टोरों ने पिछले 1-2 साल के भीतर लाइसेंस छोड़ा है, उनकी गहन निगरानी शुरू की जा रही है।
इसके अलावा सरकार लाइसेंस नियम और सख्त करने और ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत करने की तैयारी में है ताकि दवाओं की सप्लाई चेन पर निगरानी की जा सके।
जनता को भी दी जा रही चेतावनी
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे केवल रजिस्टर्ड मेडिकल स्टोर और सही बिल के साथ ही दवाएं खरीदें। किसी संदिग्ध दवा या दुकान की जानकारी मिलने पर तुरंत स्वास्थ्य विभाग को सूचित करने की सलाह दी गई है।
UP सरकार इस अभियान को स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हुए पूरे प्रदेश में विस्तार दे रही है। उम्मीद की जा रही है कि इस सख्ती से नकली दवाओं का काला कारोबार काफी हद तक दबेगा और लोग सुरक्षित दवाओं का उपयोग कर पाएंगे।
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