संयुक्त राष्ट्र (UN) के अगले महासचिव को लेकर वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मौजूदा महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, जिन्हें वर्ष 2016 में चुना गया था, अपना कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं। गुटेरेस पुर्तगाल से हैं और पूर्वी यूरोप समूह के उम्मीदवार माने जाते हैं। परंपरा के अनुसार, हर बार महासचिव का चयन विभिन्न क्षेत्रीय समूहों के बीच संतुलन के आधार पर होता है। इसी वजह से अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार यह पद लैटिन अमेरिका के किसी नेता को मिल सकता है, क्योंकि उस क्षेत्र से अब तक कोई महासचिव नहीं चुना गया है।
UN महासचिव का चुनाव कैसे होता है?
UN महासचिव चुनने की प्रक्रिया कई चरणों से गुजरती है, जिसमें औपचारिक मतदान से अधिक राजनीतिक सहमति का महत्व होता है।
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नामांकन प्रक्रिया
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सदस्य देश अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम UN महासभा और सुरक्षा परिषद को भेजते हैं।
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उम्मीदवार किसी भी देश द्वारा नामित किया जा सकता है, लेकिन अनौपचारिक रूप से क्षेत्रीय बैलेंस का ध्यान रखा जाता है।
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सुरक्षा परिषद की भूमिका
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15 सदस्यों वाली सुरक्षा परिषद उम्मीदवारों पर विचार करती है।
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यहाँ P5 देशों (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन) के पास वीटो अधिकार होता है।
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किसी भी उम्मीदवार का चयन तभी संभव है, जब P5 में से कोई भी उसके खिलाफ वीटो न करे।
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महासभा की स्वीकृति
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सुरक्षा परिषद द्वारा चुने गए उम्मीदवार को UN महासभा के सामने रखा जाता है।
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आमतौर पर महासभा इस चयन को मंजूरी दे देती है, क्योंकि सभी सदस्य देशों की राजनीतिक सहमति पहले ही बन चुकी होती है।
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कौन-कौन हो सकते हैं प्रमुख दावेदार?
हालांकि अभी आधिकारिक सूची सामने नहीं आई है, लेकिन कुछ नामों की चर्चा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तेजी से हो रही है:
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अलिशिया बार्सेना (मैक्सिको) – पूर्व UN अधिकारी और वर्तमान में एक वरिष्ठ राजनयिक
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मिशेल बैचेलेट (चिली) – पूर्व राष्ट्रपति और मानवाधिकार मुद्दों पर सक्रिय
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एंटोनियो कोस्टा (पुर्तगाल) – हालांकि ये लैटिन अमेरिकी नहीं हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका नाम भी चर्चा में है
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क्रिस्टिना फर्नांडीज डी किर्श्नर (अर्जेंटीना) – हालांकि विवादों के कारण उनकी संभावनाएँ कम मानी जाती हैं
क्यों बढ़ी लैटिन अमेरिका की दावेदारी?
अब तक दक्षिण अमेरिका या लैटिन अमेरिकी क्षेत्र से कोई महासचिव नहीं चुना गया है, जबकि अफ्रीका, एशिया और यूरोप को अवसर मिल चुका है। इस क्षेत्र का भू-राजनीतिक महत्व बढ़ने और वैश्विक दक्षिण के प्रतिनिधित्व की मांग के चलते, इस बार इन उम्मीदवारों की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।
निष्कर्ष
अगला UN महासचिव केवल प्रशासनिक प्रमुख नहीं, बल्कि वैश्विक संघर्षों, जलवायु संकट, मानवाधिकार और शांति अभियानों की दिशा तय करने वाला सबसे महत्वपूर्ण नेतृत्व होगा। इसलिए दुनिया की निगाहें इस चयन प्रक्रिया और संभावित नामों पर टिकी हैं।
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