भारत में किडनी से जुड़ी बीमारियों की रफ्तार डराने वाली है। हाल ही में जारी एक स्टडी रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया में क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) के मामलों में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। साल 2023 के डेटा के अनुसार, देश में लगभग 13.8 करोड़ लोग इस गंभीर बीमारी से प्रभावित हैं। चीन में यह संख्या सबसे अधिक है, जहां करीब 15.2 करोड़ मरीज CKD से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी की बीमारी भविष्य में भारत के लिए सबसे बड़ी हेल्थ क्राइसिस साबित हो सकती है, यदि समय रहते सतर्कता नहीं बरती गई तो।
CKD आखिर इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है?
किडनी की बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और अक्सर तब सामने आती है जब 70-80% किडनी खराब हो चुकी होती है। डॉक्टरों के अनुसार भारत में CKD के बढ़ने की कुछ बड़ी वजहें हैं—
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हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज, जो किडनी के सबसे बड़े दुश्मन हैं
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जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड और ज्यादा नमक का सेवन
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धूम्रपान और अल्कोहल
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शरीर में पानी की कमी
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सस्ते पेनकिलर्स का अधिक सेवन
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मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी
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इनफेक्शन और प्रदूषण का असर
इन आदतों की वजह से किडनी लगातार क्षतिग्रस्त होती जाती है और धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती है।
भारत में क्यों ज्यादा है खतरा?
विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत में—
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बड़ी जनसंख्या
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स्वास्थ्य जांच की कमी
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बीमारी के प्रति जागरूकता न होना
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महंगे इलाज की वजह से देर से इलाज शुरू होना
ये स्थितियां मरीजों की संख्या को और बढ़ा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारी का पता भी बहुत देर से चलता है, जब केवल डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट ही विकल्प बचता है।
किन संकेतों को नजरअंदाज न करें?
यदि आपको ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
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हाथ-पैरों में सूजन
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झागदार या गाढ़ा मूत्र
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लगातार थकान
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भूख कम लगना
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हाई BP या शुगर का कंट्रोल में न रहना
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कमर या पीठ के निचले हिस्से में दर्द
किडनी को बचाने के आसान उपाय
पर्याप्त पानी पिएं
नमक और प्रोसेस्ड फूड कम करें
डायबिटीज और BP कंट्रोल में रखें
धूम्रपान और शराब से दूरी
नियमित स्वास्थ्य जांच
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