Som Pradosh Vrat 2025: मार्गशीर्ष माह का पहला सोम प्रदोष व्रत 17 नवंबर 2025 को पड़ रहा है। यह तिथि भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। माना जाता है कि प्रदोष तिथि पर विशेष रूप से सोमवार का योग मिलने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन सच्चे मन से किए गए पूजा-पाठ, दान और सरल उपाय व्यक्ति के जीवन में शांति, समृद्धि और बाधा-नाश लेकर आते हैं।
सोम प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष काल वह समय होता है जब भगवान शिव और देवी पार्वती अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए जागृत रहते हैं।
विशेष रूप से सोमवार का प्रदोष —
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मानसिक शांति,
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स्वास्थ्य लाभ,
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सौभाग्य में वृद्धि
का मार्ग खोलता है।
पौराणिक मान्यता है कि इस व्रत से संतान सुख, वैवाहिक जीवन में मधुरता और कष्टों का नाश होता है।
व्रत और पूजा विधि
1. सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें
शिव-पार्वती की प्रतिमा या शिवलिंग के सामने बैठकर सकल विश्व के कल्याण की भावना से संकल्प लें।
2. प्रदोष काल में पूजा करें
प्रदोष काल सूर्यास्त से लगभग 1.5 घंटे पहले और बाद तक माना जाता है।
यही समय भगवान शिव की उपासना का सबसे उत्तम मुहूर्त है।
3. करें शिवलिंग का अभिषेक
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दूध
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दही
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शहद
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गंगाजल
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बेलपत्र
इनसे अभिषेक करने पर शिवजी विशेष प्रसन्न होते हैं।
4. शिव मंत्रों का जाप
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“ॐ नमः शिवाय”
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“महामृत्युंजय मंत्र”
इनका जाप अत्यंत शुभ माना जाता है।
शिव कृपा पाने का खास उपाय
बेलपत्र पर सफेद चंदन से ‘ॐ’ लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करें
यह उपाय सोम प्रदोष के दिन अत्यंत फलदायी माना गया है।
मान्यता के अनुसार इससे —
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घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है,
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आर्थिक बाधाएँ समाप्त होती हैं,
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भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
इसके साथ ही दीपक जलाकर भगवान शिव को लौंग और मिश्री का भोग लगाने से सौभाग्य बढ़ता है।
निष्कर्ष
17 नवंबर 2025 का सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव की असीम कृपा पाने का उत्तम अवसर है।
श्रद्धा, भक्ति और सरल उपायों से किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मकता, सफलता और शांति लाता है।
शिव भक्तों के लिए यह दिन आध्यात्मिक ऊर्जा और आशीष का विशेष द्वार खोलता है।
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