रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो चुकी हैं। इसी बीच एक नई रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है कि अमेरिका अप्रत्यक्ष रूप से रूस और यूक्रेन के बीच संभावित शांति वार्ता की जमीन तैयार करने की कोशिश कर रहा है। बताया जा रहा है कि वॉशिंगटन के कुछ प्रभावशाली रणनीतिक सलाहकार हाल ही में दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी बिजनेसमैन और पूर्व सलाहकार विटकॉफ इस कथित पहल के केंद्र में हैं। माना जाता है कि विटकॉफ ने ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक संभावित फोन कॉल की सलाह दी थी। उनका इरादा यह था कि अगर ऐसा संवाद होता है, तो इससे यूक्रेन से जुड़ी जटिल स्थिति पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है और तनाव कम करने की दिशा में कुछ बुनियादी पहल संभव हो सकती है।
यह भी बताया जा रहा है कि ये चर्चाएँ यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के वॉशिंगटन दौरे से पहले हुई थीं। जेलेंस्की ने 17 अक्टूबर को अमेरिका की यात्रा की थी, जहाँ उन्होंने सैन्य सहयोग, हथियार आपूर्ति और युद्ध की मौजूदा स्थिति पर अमेरिकी नेतृत्व से चर्चा की थी। इस यात्रा को युद्ध के इस निर्णायक चरण में बेहद महत्वपूर्ण माना गया था।
रिपोर्ट्स इस बात पर जोर देती हैं कि वॉशिंगटन में कुछ समूह युद्ध को समाप्त करने या इसे नियंत्रित ढांचे में लाने के लिए वैकल्पिक मार्ग तलाश रहे हैं, क्योंकि युद्ध लंबा खिंचने से यूरोप और वैश्विक सुरक्षा तंत्र पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिका, रूस और यूक्रेन—तीनों के लिए युद्ध अब भारी आर्थिक, सैन्य और राजनीतिक बोझ का रूप ले चुका है। ऐसे में शांति वार्ता की किसी भी संभावना को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय गंभीरता से निगाहें बनाए हुए है।
हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि विटकॉफ की सुझाई गई फोन कॉल कब और कैसे हो सकेगी या क्या यह प्रयास आधिकारिक स्तर पर स्वीकार किए जाएंगे। फिर भी यह रिपोर्ट इस बात का संकेत देती है कि शांति के रास्ते तलाशने के लिए अब पर्दे के पीछे कई परतों में कूटनीतिक गतिविधियाँ जारी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका वास्तव में ऐसी किसी पहल में शामिल है, तो यह युद्ध के भविष्य और क्षेत्रीय स्थिरता पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। फिलहाल, इस पूरे मामले पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।
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