Ram Mandir Dhwajarohan Muhurat: अयोध्या राम मंदिर में अभिजीत मुहूर्त को ही क्यों चुना गया? 44 मिनट में पूरा होगा ध्वजारोहण


 अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में आज 25 नवंबर, विवाह पंचमी के शुभ अवसर पर केसरिया धर्म ध्वज की स्थापना की जा रही है। यह ध्वजारोहण एक अत्यंत पवित्र और शुभ समय—अभिजीत मुहूर्त—में सम्पन्न होगा, जो केवल 44 मिनट का होता है। इस मुहूर्त में भगवान श्रीराम के मंदिर पर धर्म ध्वज स्थापित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

अभिजीत मुहूर्त ही क्यों चुनते हैं?

अभिजीत मुहूर्त को ज्योतिष में अत्यंत शक्तिशाली और सफल कार्यों का समय माना गया है। इसकी विशेषताएं—

  • यह किसी भी बाधा, दोष या ग्रह-स्थिति के प्रभाव से मुक्त माना जाता है।

  • भगवान विष्णु का प्रिय समय कहा गया है, और भगवान राम विष्णु के अवतार हैं, इसलिए यह मुहूर्त अधिक पवित्र माना जाता है।

  • इस समय किए गए धार्मिक कार्य सिद्धि और सफलता प्रदान करते हैं।

  • शुभता में यह मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त के बाद सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

इसी कारण राम मंदिर में ध्वज की स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त का चयन किया गया।

44 मिनट का शुभ योग

अभिजीत मुहूर्त रोज नहीं होता, बल्कि सूर्य की गति के अनुसार इसकी अवधि सीमित रहती है, जो लगभग 44 मिनट की होती है।
राम मंदिर ध्वजारोहण भी इसी समय सीमा में सम्पन्न होगा। इस पवित्र कार्य को इतने निर्णायक समय में पूर्ण करना धार्मिक मान्यता के अनुसार शुभ फलदायी माना जाता है।

केसरिया धर्म ध्वज का महत्व

  • केसरिया रंग बलिदान, शौर्य और धर्म का प्रतीक है।

  • यह सनातन धर्म की परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का स्वरूप माना जाता है।

  • मंदिरों पर भगवा ध्वज स्थापित करना धार्मिक और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है।

राम मंदिर के शिखर पर यह ध्वज सनातन संस्कृति की अखंड ज्योति और रामराज्य की भावना को दर्शाता है।

विवाह पंचमी पर ध्वजारोहण क्यों?

विवाह पंचमी वह तिथि है जब भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था।
यह तिथि—

  • शुभता

  • धर्म

  • मर्यादा

  • और पवित्रता

के योग से भरी मानी जाती है। इसीलिए इस दिन ध्वज की स्थापना और भी अधिक शुभ मानी गई।

निष्कर्ष

अयोध्या राम मंदिर में धर्म ध्वज का अभिजीत मुहूर्त में ध्वजारोहण आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह 44 मिनट का समय शुभ और सिद्धि देने वाला माना जाता है, और इसी पवित्र क्षण में रामलला के मंदिर पर केसरिया ध्वज स्थापित होकर सनातन परंपरा की दिव्यता को और अधिक ऊँचाई प्रदान करेगा।

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