लंबे समय से यह सवाल लोगों के मन में था कि गर्भावस्था के दौरान पैरासिटामोल (Paracetamol) लेने से क्या बच्चों में ऑटिज्म (Autism) या एडीएचडी (ADHD) जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है? अब इस पर नई रिसर्च ने स्पष्ट जवाब दे दिया है — ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक सबूत नहीं मिला है।
रिसर्च में क्या पाया गया
विशेषज्ञों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने हाल ही में कई बड़े अध्ययनों की समीक्षा की है।
इन अध्ययनों में हजारों गर्भवती महिलाओं और उनके बच्चों के डेटा का विश्लेषण किया गया।
परिणामों में पाया गया कि:
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पैरासिटामोल के सामान्य और चिकित्सकीय खुराक में उपयोग से
बच्चों में ऑटिज्म या एडीएचडी का खतरा नहीं बढ़ता। -
गर्भावस्था के दौरान बुखार या दर्द से राहत के लिए इसका इस्तेमाल
सुरक्षित और प्रभावी माना जा सकता है। -
पहले जिन अध्ययनों में जोखिम का दावा किया गया था,
वे सीमित नमूने और भ्रमित कारकों (confounding factors) पर आधारित थे।
डॉक्टर्स की राय
डॉक्टर्स का कहना है कि यह दवा दशकों से सुरक्षित दर्दनिवारक और बुखार कम करने वाली दवा के रूप में उपयोग की जा रही है।
हालांकि, किसी भी दवा की तरह, इसे भी केवल डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए —
खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए, ताकि खुराक और अवधि नियंत्रित रहे।
क्या ध्यान रखें गर्भवती महिलाएं
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खुद से बार-बार दवा न लें,
सिर्फ जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार लें। -
यदि बुखार या दर्द बार-बार हो रहा है,
तो इसके मूल कारण की जांच जरूर करवाएं। -
अन्य दवाओं के साथ संयोजन से पहले डॉक्टर से राय लें,
क्योंकि कुछ दवाएं पैरासिटामोल के असर को बदल सकती हैं।
निष्कर्ष
नई रिसर्च ने इस मिथक को तोड़ दिया है कि पैरासिटामोल से बच्चों में ऑटिज्म या एडीएचडी का खतरा होता है।
सही तरीके से और सीमित मात्रा में उपयोग करने पर यह दवा अभी भी गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित मानी जाती है।
इसलिए, अगर डॉक्टर सलाह दें तो पैरासिटामोल लेने से डरने की जरूरत नहीं —
बल्कि अनियंत्रित बुखार या दर्द को नजरअंदाज करना ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है।
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