पड़ोसी देश पाकिस्तान में कार खरीदना आम लोगों के लिए लगभग असंभव जैसा हो गया है। वहां कारों की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। स्थिति यह है कि जहां भारत में ये गाड़ियां मिड-रेंज सेगमेंट में आती हैं, वहीं पाकिस्तान में वही कारें करोड़ों में बिक रही हैं।
टोयोटा फॉर्च्यूनर 1.49 करोड़ पाकिस्तानी रुपये, मारुति सुजुकी स्विफ्ट 44 लाख, और वैगनआर करीब 32 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। इतनी जबरदस्त बढ़ोतरी ने आम ग्राहकों की कमर तोड़ दी है।
पाकिस्तान में कारों की कीमतें आखिर इतनी ज्यादा क्यों हैं? आइए कारण समझते हैं।
1. कमजोर आर्थिक स्थिति और गिरती मुद्रा
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पिछले कई वर्षों से संकट में है।
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पाकिस्तानी रुपये की डॉलर के मुकाबले लगातार गिरावट
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विदेशी मुद्रा भंडार की कमी
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IMF की शर्तों के कारण कड़े आर्थिक फैसले
इन सबने कारों के आयात और उत्पादन की लागत को बहुत बढ़ा दिया है।
क्योंकि पाकिस्तान में अधिकांश ऑटो पार्ट्स बाहर से आते हैं, इसलिए डॉलर महंगा होने का सीधा असर कारों की कीमत पर पड़ता है।
2. कार कंपनियों का लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर कम फोकस
भारत की तरह पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर लोकल मैन्युफैक्चरिंग नहीं होती।
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भारत में कारों के 80–95% तक पार्ट्स देश के अंदर बन जाते हैं
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पाकिस्तान में यह अनुपात काफी कम है
इस वजह से पाकिस्तान में गाड़ियां काफी महंगी पड़ती हैं।
3. भारी टैक्स और कस्टम ड्यूटी
पाकिस्तान सरकार टैक्स और इम्पोर्ट ड्यूटी पर काफी निर्भर है।
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कारों पर 100% से ज्यादा इम्पोर्ट ड्यूटी
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लग्जरी कारों पर अतिरिक्त टैक्स
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सेल्स टैक्स और रजिस्ट्रेशन चार्ज
इन सबको मिलाकर कार की कीमत दोगुनी तक हो जाती है।
4. कंपनियों की उत्पादन क्षमता में कमी
पाकिस्तान में कई ऑटो कंपनियों ने
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उत्पादन घटा दिया
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कई बार फैक्ट्रियों में शटडाउन लगाए
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पार्ट्स की कमी के चलते लंबी वेटिंग लिस्ट बनाई
कम उत्पादन का सीधा असर कीमतों पर पड़ता है।
5. महंगाई और जनता की घटती खरीद क्षमता
पाकिस्तान में महंगाई 30–40% तक पहुंच गई है।
अब आम ग्राहक नई कार तो दूर, दूसरी हाथ की कार भी मुश्किल से खरीद पा रहे हैं। इस बीच कंपनियां कीमतें कम करने की स्थिति में नहीं हैं।
भारत और पाकिस्तान की कार कीमतों में इतना अंतर क्यों?
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भारत में मैन्युफैक्चरिंग हब — कम लागत
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लोकल सप्लाई चेन मजबूत
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बड़ी आबादी के कारण ज्यादा बिक्री, जिससे कीमतें स्थिर
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रूपया डॉलर के मुकाबले अपेक्षाकृत स्थिर
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सरकार द्वारा उद्योग को लगातार समर्थन
इसीलिए फॉर्च्यूनर भारत में 35–55 लाख में मिलती है, जबकि पाकिस्तान में 1.49 करोड़ तक पहुंच गई है।
निष्कर्ष
पाकिस्तान में कार खरीदना अब लक्जरी नहीं, बल्कि करोड़ों का निवेश जैसा हो गया है। महंगाई, आर्थिक संकट, आयात निर्भरता और भारी टैक्स ने आम लोगों की जेब पर भारी बोझ डाल दिया है।
अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में कारें पाकिस्तान में और भी महंगी हो सकती हैं
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