New Rule: अब ई-कॉमर्स साइट्स पर आसानी से ढूंढ सकेंगे ‘Made in India’ प्रोडक्ट्स, सरकार ला रही है नया नियम


ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी है। अब उपभोक्ताओं को यह जानने में परेशानी नहीं होगी कि कोई प्रोडक्ट भारत में बना है या विदेश में। केंद्र सरकार ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर “Country of Origin” (उत्पाद की उत्पत्ति का देश) को और स्पष्ट तरीके से दिखाने के लिए नया नियम लाने जा रही है। इस कदम का उद्देश्य ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को बढ़ावा देना और ग्राहकों को पारदर्शिता के साथ खरीदारी का अनुभव देना है।

सरकार का नया प्रस्ताव – आसान पहचान, ज्यादा पारदर्शिता

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने एक नया ड्राफ्ट नियम तैयार किया है, जिसके तहत सभी प्रमुख ई-कॉमर्स वेबसाइट्स — जैसे Amazon, Flipkart, Meesho और अन्य — को अपनी साइट पर हर प्रोडक्ट के साथ उसके Country of Origin की जानकारी प्रमुख रूप से प्रदर्शित करनी होगी। इतना ही नहीं, ग्राहकों को “Made in India” जैसे उत्पादों को फिल्टर और सर्च करने की सुविधा भी दी जाएगी।

इस नियम के लागू होने के बाद, यदि कोई ग्राहक केवल भारतीय उत्पाद खरीदना चाहता है, तो वह फिल्टर विकल्प चुनकर “Made in India” प्रोडक्ट्स की पूरी लिस्ट देख सकेगा। इससे स्थानीय निर्माताओं और MSME सेक्टर को भी सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।

‘वोकल फॉर लोकल’ मुहिम को मिलेगा बल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “वोकल फॉर लोकल” मुहिम को बढ़ावा देने के लिए सरकार लंबे समय से ऐसे कदम उठा रही है। कोरोना महामारी के बाद से देश में स्वदेशी उत्पादों की मांग में बढ़ोतरी देखी गई थी, लेकिन ई-कॉमर्स साइट्स पर विदेशी और घरेलू उत्पादों के बीच फर्क करना ग्राहकों के लिए मुश्किल हो गया था। नया नियम इस कमी को दूर करेगा और उपभोक्ताओं को अधिक सूझबूझ भरे फैसले लेने में मदद करेगा।

ई-कॉमर्स कंपनियों की प्रतिक्रिया

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय ने ई-कॉमर्स कंपनियों से भी इस प्रस्ताव पर सुझाव मांगे हैं। कुछ कंपनियों ने इस नियम का स्वागत किया है, जबकि कुछ का कहना है कि तकनीकी बदलावों और डेटा अपडेट में समय लग सकता है। हालांकि, उपभोक्ता संगठनों का मानना है कि यह कदम उपभोक्ता अधिकारों को मजबूत करेगा और “मेक इन इंडिया” ब्रांड की विश्वसनीयता बढ़ाएगा।

कब तक लागू होगा नियम?

मंत्रालय के अनुसार, ड्राफ्ट नियम पर सार्वजनिक सुझाव प्राप्त होने के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। संभावना है कि यह नियम 2026 की शुरुआत तक लागू हो सकता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ