फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta के खिलाफ स्पेन में बड़ा फैसला आया है। स्पेन की एक अदालत ने डेटा गोपनीयता और विज्ञापन बाज़ार में अनुचित प्रतिस्पर्धा के आरोपों पर मेटा को 81 मीडिया संस्थानों को कुल 481 मिलियन यूरो का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला यूरोप में डेटा सुरक्षा कानूनों को लेकर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।
अदालत में दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि मेटा ने स्पेनिश यूजर्स के व्यक्तिगत डेटा का अवैध रूप से ट्रैकिंग और विश्लेषण किया। कंपनी ने इस डेटा का उपयोग लक्षित विज्ञापन (Targeted Advertising) के लिए किया, जिससे उसे डिजिटल विज्ञापन उद्योग में अनुचित बढ़त मिली। इससे स्थानीय मीडिया संस्थानों की राजस्व कमाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
मीडिया हाउसेज़ का कहना था कि मेटा की डेटा-आधारित विज्ञापन रणनीति ने उन्हें प्रतिस्पर्धा में कमजोर कर दिया, क्योंकि वे उसी स्तर की टार्गेटिंग सुविधा प्रदान नहीं कर सकते। अदालत ने जांच के बाद माना कि मेटा ने यूरोप के GDPR (General Data Protection Regulation) कानूनों का उल्लंघन किया है और बिना स्पष्ट सहमति के यूजर डेटा का दुरुपयोग किया है।
फैसले के प्रमुख बिंदु:
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मेटा को 81 मीडिया संस्थानों को 481 मिलियन यूरो की राशि चुकानी होगी।
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अदालत ने माना कि मेटा ने उपयोगकर्ताओं की ब्राउज़िंग आदतों, लोकेशन और ऑनलाइन व्यवहार का अवैध रूप से प्रोफाइलिंग के लिए इस्तेमाल किया।
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इस दुरुपयोग के कारण पारंपरिक व डिजिटल मीडिया हाउसों की विज्ञापन आय में भारी गिरावट आई।
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अदालत ने चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसे मामलों पर और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मेटा ने अपने बयान में कहा है कि वे फैसले का अध्ययन कर रहे हैं और आगे कदम उठाने पर विचार करेंगे। कंपनी का तर्क है कि वह अपने प्लेटफार्मों पर यूजर की सहमति के आधार पर डेटा प्रोसेस करती है, और उसके विज्ञापन मॉडल पारदर्शी हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला यूरोप में टेक दिग्गजों पर बढ़ते नियामक दबाव को और मजबूत करेगा।
स्पेन के साथ-साथ कई यूरोपीय देशों में डेटा गोपनीयता और डिजिटल विज्ञापन से जुड़े कानून लगातार कठोर होते जा रहे हैं। यह फैसला डिजिटल विज्ञापन बाजार में संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस पूरे मामले ने स्पष्ट कर दिया है कि बड़ी टेक कंपनियां अब डेटा दुरुपयोग के मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई से नहीं बच सकेंगी, और भविष्य में पारदर्शी, निष्पक्ष और उपयोगकर्ता-सुरक्षित डिजिटल सिस्टम अनिवार्य होंगे।
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