देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ लेने वाले जस्टिस सूर्यकांत का जीवन सफर किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं है। 24 नवंबर 2025 को उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश का पद संभाला और 9 फरवरी 2027 तक लगभग 15 महीने तक भारत की न्यायव्यवस्था का नेतृत्व करेंगे। लेकिन आज जिस ऊंचाई पर वे खड़े हैं, वहां तक की उनकी यात्रा बेहद साधारण परिवेश से शुरू हुई थी।
हरियाणा के हिसार जिले से लगभग 136 किलोमीटर दूर स्थित छोटे से गांव पेटवाड़ की एक तपती दोपहर—गेहूं की मड़ाई चल रही थी, धूप अत्यधिक तेज थी और खेतों में थ्रेशर की आवाज गूंज रही थी। उसी खेत में पसीने से भीगा एक दुबला-पतला किशोर अपने भाइयों के साथ काम कर रहा था। अचानक उसने मशीन बंद की, आसमान की ओर देखा और आत्मविश्वास भरी आवाज में कहा—“मैं अपनी जिंदगी बदल दूंगा।” उस वक्त शायद किसी ने इस बात को गंभीरता से नहीं लिया, क्योंकि वह तो बस मैट्रिक पास, सरकारी स्कूल में बोरी पर बैठकर पढ़ने वाला एक साधारण लड़का था।
लेकिन उसी लड़के में कुछ अलग था—लगन, दृढ़ता और अपने सपनों को सच करने का साहस। वह किशोर था सूर्यकांत, जो आगे चलकर देश के सबसे बड़े न्यायिक पद तक पहुंचे। जिस बच्चे ने संघर्षों के बीच पढ़ाई की, उसी ने आगे चलकर न्यायपालिका में अपनी दक्षता, ईमानदारी और गहन समझ के दम पर एक अलग पहचान बनाई।
जस्टिस सूर्यकांत का प्रारंभिक जीवन आर्थिक चुनौतियों से भरा हुआ था। गांव के स्कूल में सीमित संसाधनों के साथ पढ़ाई करते हुए उन्होंने हमेशा बड़े लक्ष्य रखे। कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे धीरे-धीरे न्यायिक सेवा में प्रगति करते हुए एक के बाद एक महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचे। उनकी न्यायिक शैली में संवेदनशीलता, समाज की जमीनी हकीकतों की समझ और संविधान के मूल्यों के प्रति गहरा समर्पण हमेशा नजर आया।
उनकी नियुक्ति CJI के रूप में न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटे गांवों और सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। जस्टिस सूर्यकांत की कहानी यह साबित करती है कि परिस्थितियां कठिन हों या संसाधन सीमित, दृढ़ निश्चय और कड़ी मेहनत इंसान को किसी भी ऊंचाई तक ले जा सकती है।
आज जब वे भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में सर्वोच्च न्यायालय का नेतृत्व कर रहे हैं, तो उनका यह सफर गांव की मिट्टी से उठकर देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचने की मिसाल बन चुका है—एक ऐसी कहानी जो हर भारतीय युवा को प्रेरित करती है कि सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
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