भारतीय मुद्रा बाजार से एक बड़ी खबर सामने आई है। गुरुवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होता दिखा। शुरुआती कारोबार में ही रुपया फिसलकर नए निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में हलचल देखने को मिली।
शुरुआत में मामूली गिरावट, फिर और कमजोर हुआ रुपया
फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, इंटरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Interbank Foreign Exchange Market) में रुपया शुरुआती स्तर पर 88.66 प्रति डॉलर पर खुला। हालांकि कुछ ही मिनटों बाद रुपये पर दबाव बढ़ा और यह 7 पैसे कमजोर होकर 88.69 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। यह गिरावट विदेशी बाजारों में डॉलर की मजबूती और घरेलू इक्विटी बाजारों की सुस्ती के कारण देखी जा रही है।
डॉलर इंडेक्स में मजबूती का असर
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स में आई तेजी का सीधा असर रुपये पर पड़ रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में सख्ती बरकरार रखने के संकेतों से डॉलर मजबूत हुआ है। इसके चलते विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पूंजी निकाल रहे हैं, जिससे रुपया दबाव में आ गया है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई मुश्किलें
इसके साथ ही कच्चे तेल (Crude Oil) की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल ने भी रुपये की कमजोरी में भूमिका निभाई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का अधिकांश हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतें बढ़ने से डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है।
विशेषज्ञों का अनुमान: निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा
फॉरेक्स विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये में हल्का उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अगर डॉलर की मजबूती जारी रही तो रुपया 88.75 के स्तर को भी छू सकता है। वहीं, घरेलू बाजार से सकारात्मक आर्थिक संकेत मिलने पर थोड़ी सुधार की संभावना बनी हुई है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए
विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि फिलहाल विदेशी मुद्रा में ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। डॉलर के मुकाबले रुपये की अस्थिरता से आयात-निर्यात से जुड़े सेक्टर पर भी असर पड़ सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए है, ताकि रुपये की अत्यधिक गिरावट को नियंत्रित किया जा सके।
.jpg)
0 टिप्पणियाँ