हम अक्सर अपने घरों और आसपास मौजूद तेज रोशनी को सामान्य मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसकी वजह से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। हाल ही में सामने आए अध्ययनों के अनुसार, अत्यधिक प्रकाश प्रदूषण (Light Pollution) हमारे हृदय स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है। खासकर रात के समय ट्यूबलाइट, LED बल्ब और बाहर की तेज रोशनी शरीर के नैचुरल कार्यों में बाधा डालती है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के शोधकर्ताओं ने उन व्यक्तियों पर अध्ययन किया, जिनके घरों के आसपास रात में बहुत ज्यादा आर्टिफिशियल लाइट रहती है। इस रिसर्च में पाया गया कि ऐसी रोशनी के लंबे समय तक संपर्क में रहने से
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हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है
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हार्ट अटैक की संभावना अधिक हो जाती है
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नींद की गुणवत्ता कम होती है, जिससे शरीर की रिकवरी बाधित होती है
ऐसा क्यों होता है?
रात को शरीर को अंधेरा चाहिए होता है ताकि मेलाटोनिन हॉर्मोन बन सके।
लेकिन तेज रोशनी:
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मेलाटोनिन को दबा देती है
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सर्कैडियन रिद्म यानी बॉडी क्लॉक को बिगाड़ती है
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ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल और स्ट्रेस हॉर्मोन बढ़ जाते हैं
ये सभी मिलकर दिल को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
किन लोगों को ज्यादा खतरा?
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शहरी क्षेत्रों में रहने वाले
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नींद के दौरान कमरा रोशन रखने वाले
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रात में मोबाइल/टीवी की स्क्रीन के संपर्क में रहने वाले
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पहले से उच्च रक्तचाप या मधुमेह से ग्रसित लोग
कैसे बचें?
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सोने के दौरान कमरे में पूरी तरह अंधेरा रखें
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सोने से पहले मोबाइल और टीवी का उपयोग कम करें
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खिड़की से आने वाली बाहरी रोशनी रोकने के लिए ब्लैकआउट पर्दे लगाएं
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बेडरूम में लो-इंटेंसिटी नाइट लैंप का विकल्प चुनें
विशेषज्ञों का मानना है कि रात में प्राकृतिक अंधेरा दिल की सेहत के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसलिए, रोशनी को कम करके न सिर्फ आप बेहतर नींद पा सकते हैं, बल्कि हार्ट अटैक और अन्य कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के खतरे को भी कम कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट हमें यह समझने की चेतावनी देती है कि
अत्यधिक रोशनी सिर्फ आंखों और नींद के लिए ही नहीं, बल्कि दिल के लिए भी खतरा साबित हो सकती है। अपने घर और जीवनशैली में छोटे बदलाव लाकर आप अपने दिल को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं।
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