Google पर बढ़ी मुश्किलें: यूरोपीय संघ ने स्पैम पॉलिसी को लेकर शुरू की एंटीट्रस्ट जांच, दोषी पाए गए तो भरना पड़ सकता है भारी जुर्माना


 गूगल एक बार फिर यूरोपीय नियामकों की निगरानी में आ गया है। इस बार मामला उसकी स्पैम पॉलिसी से जुड़ा है, जिसे लेकर यूरोपीय संघ ने औपचारिक एंटीट्रस्ट जांच शुरू कर दी है। प्रकाशकों और डिजिटल मीडिया कंपनियों का आरोप है कि गूगल की नई स्पैम नीति सीधे तौर पर उनकी वेबसाइट ट्रैफिक और राजस्व को प्रभावित कर रही है। उनका कहना है कि गूगल द्वारा “स्पैम कंटेंट” की परिभाषा और उस पर की जाने वाली कार्रवाई पारदर्शी नहीं है, जिसकी वजह से वैध वेबसाइटें भी प्रभावित हो रही हैं।

यूरोपीय आयोग ने कहा है कि वह जांच करेगा कि कहीं गूगल अपनी मार्केट डॉमिनेंस का दुरुपयोग करके प्रकाशकों के हितों को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहा। आयोग यह भी देखेगा कि क्या गूगल की स्पैम पॉलिसी निष्पक्ष है और क्या यह प्रतिस्पर्धा को सीमित करती है। अगर गूगल दोषी पाया गया, तो उस पर EU के कानून के तहत अत्यंत भारी जुर्माना लगाया जा सकता है, जो कंपनी के वैश्विक राजस्व का एक बड़ा हिस्सा हो सकता है।

प्रकाशकों का आरोप है कि नई पॉलिसी के कारण गूगल कई वेबसाइटों को स्पैम बताकर उनकी रैंकिंग कम कर देता है। इसके चलते उनकी कमाई पर बड़ा असर पड़ रहा है। कई छोटे और स्वतंत्र मीडिया समूहों ने कहा है कि बिना किसी ठोस व्याख्या के उनके आर्टिकल सर्च नतीजों में नीचे चले जाते हैं, जबकि वे पूरी तरह वैध और ऑरिजनल कंटेंट पब्लिश करते हैं।

यूरोपीय संघ की यह जांच डिजिटल सेक्टर में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। पहले भी EU ने गूगल पर कई मामलों में कार्रवाई की है, जिसमें सर्च मार्केट में मोनोपॉली, एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम और विज्ञापन नीतियां शामिल हैं। गूगल ने फिलहाल कहा है कि वह जांच में पूरा सहयोग करेगा और अपनी नीतियों को पारदर्शी तरीके से समझाने के लिए प्रतिबद्ध है।

जांच के परिणाम आगे चलकर यूरोप ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में गूगल की नीतियों और सर्च इंजन नियमों पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। प्रकाशकों को उम्मीद है कि इस कदम से प्लेटफ़ॉर्म पर निष्पक्षता बढ़ेगी और डिजिटल मीडिया को अपने दर्शकों तक पहुंचने में अधिक पारदर्शिता और स्वतंत्रता मिलेगी

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