जोहान्सबर्ग में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय मूल के प्रमुख टेक उद्यमियों से एक विशेष मुलाक़ात की। यह बैठक भारत और वैश्विक टेक समुदाय के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पीएम मोदी ने उद्यमियों के साथ भारत की डिजिटल प्रगति, उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम और टेक्नोलॉजी को सामाजिक परिवर्तन के साधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि यह एक "Fruitful Interaction" रहा। उन्होंने बताया कि भारतीय मूल के ये टेक नेता दुनिया भर में तकनीकी नवाचारों को नई दिशा दे रहे हैं, और भारत उनके अनुभव व विशेषज्ञता का स्वागत करता है। प्रधानमंत्री ने उन्हें भारत के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया, ताकि उभरती तकनीकों—जैसे एआई, साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डाटा-ड्रिवन इनोवेशन—के विकास को गति मिल सके।
पीएम मोदी ने इस बातचीत के दौरान भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत न केवल दुनिया का सबसे बड़ा खुला डिजिटल बाजार है, बल्कि यहां की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई)—जैसे आधार, यूपीआई, डीजी लॉकर, ओएनडीसी आदि—दुनिया के लिए मॉडल साबित हो रही है। भारतीय मूल के इन उद्यमियों ने भी भारत में बढ़ते स्टार्टअप अवसरों, सरकारी नीतियों और वैश्विक सहयोग की संभावनाओं की सराहना की।
प्रधानमंत्री ने उन्हें भारत में तकनीकी शोध एवं निवेश बढ़ाने के लिए प्रेरित किया और कहा कि ऐसे वैश्विक भारतीयों की भागीदारी भारत के विकास पथ को और मजबूत बना सकती है। यह मुलाक़ात न केवल टेक सेक्टर में सहयोग बढ़ाने का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत वैश्विक तकनीकी नेतृत्व में अपना योगदान बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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