Epilepsy: मिर्गी आने पर तुरंत क्या करें और क्या नहीं? इन गलतियों से बढ़ सकता है खतरा


 मिर्गी का दौरा (Seizure) एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें मरीज अचानक बेहोश होकर झटके खाने लगता है, शरीर कड़ा हो सकता है, सांस रुक-रुककर चलती है और कई बार मुंह से झाग भी निकल सकता है। ऐसे समय पर आसपास मौजूद लोगों की सही या गलत प्रतिक्रिया मरीज की जान तक बचा या खतरे में डाल सकती है।

हमारे समाज में कई तरह की गलत धारणाएं फैली हैं—जैसे जूते सूंघाना, पानी पिलाना, मुंह में चम्मच डालना आदि। डॉक्टरों के अनुसार ये सभी तरीके खतरनाक और पूरी तरह गलत हैं। आइए जानें कि दौरा पड़ने पर क्या करना चाहिए और क्या बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

मिर्गी का दौरा आने पर क्या करना चाहिए?

1. मरीज को सुरक्षित जगह पर लिटाएं

  • आसपास से तेज, नुकीली या भारी वस्तुएं हटा दें।

  • मरीज को एक तरफ करवट (Recovery Position) में लिटाएं, ताकि सांस आसानी से चलती रहे और लार बाहर निकल सके।

2. सिर को सहारा दें

  • सिर के नीचे किसी मुलायम चीज़—जैसे दुपट्टा, तकिया या जैकेट—का सहारा दें।

  • इससे सिर को चोट लगने का खतरा कम होता है।

3. दौरे का समय नोट करें

  • यदि दौरा 5 मिनट से अधिक चलता है, तो यह मेडिकल इमरजेंसी है। तुरंत डॉक्टर या एम्बुलेंस बुलाएं।

4. कपड़े ढीले करें

  • गर्दन के आसपास के तंग कपड़ों—जैसे टाई, स्कार्फ या कॉलर—को ढीला कर दें ताकि सांस लेने में दिक्कत न हो।

5. शांत रहें और मरीज के साथ रहें

  • मरीज को जब होश आएगा, तो वह भ्रमित, थका हुआ या डरा हुआ हो सकता है।

  • उसे भरोसा दें और शांत रहने में मदद करें।

मिर्गी के दौरान क्या नहीं करना चाहिए? (बहुत महत्वपूर्ण)

1. मरीज के मुंह में कुछ भी न डालें

  • चम्मच, उंगली, कपड़ा, चाबी या जग्रिया डालने से दांत टूट सकते हैं, जबड़ा डिसलोकेट हो सकता है और सांस रुक सकती है।

  • धारणा कि “जीभ उलट जाएगी” गलत है—जीभ उलटकर घुटन नहीं करती।

2. जूते सूंघाना या बदबूदार चीजें पास लाना बिल्कुल नहीं

  • जूते सूंघाने से दौरा रुकता नहीं।

  • यह मरीज को नुकसान पहुंचा सकता है और संक्रमण का कारण बन सकता है।

  • यह पूरी तरह मिथक है।

3. मरीज को पकड़कर झटकों को रोकने की कोशिश न करें

  • इससे हड्डी या मांसपेशियों में चोट लग सकती है।

  • शरीर को खुद ही झटकों से निकलने दें।

4. मरीज को पानी या दवा पिलाएं

  • दौरे के दौरान निगलने की क्षमता बंद होती है। पानी या दवा देने से घुटन हो सकती है।

5. भीड़ न लगाएं

  • हवा की कमी और घबराहट की स्थिति मरीज की हालत बिगाड़ सकती है।

कब तुरंत डॉक्टर या एम्बुलेंस बुलानी चाहिए?

  • दौरा 5 मिनट से ज्यादा चले

  • लगातार दो दौरे आएं

  • मरीज गर्भवती हो, डायबिटिक हो या हादसे में घायल हो

  • पहली बार दौरा पड़ा हो

  • दौरे के बाद सांस ठीक से न आ रही हो

निष्कर्ष

मिर्गी का दौरा एक मेडिकल कंडीशन है, अंधविश्वास का नहीं। दौरे के दौरान सही प्रतिक्रिया—जैसे मरीज को सुरक्षित करवट में लिटाना और मुंह में कुछ न डालना—उसकी जान बचा सकती है। वहीं जूते सूंघाने या पकड़कर झटके रोकने जैसी गलतियां स्थिति को और खराब कर सकती हैं।

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