Delhi-NCR Pollution Crisis: हर दिन 18-20 सिगरेट के बराबर जहरीली हवा, बच्चों-बुजुर्गों के लिए गंभीर खतरा


 दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और बिहार इस समय दुनिया के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में शामिल हो चुके हैं। पूरे क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब स्तर पर पहुंच गई है। कई शहरों में एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (AQI) 400 से 800 के बीच रिकॉर्ड किया जा रहा है, जो ‘सीवियर’ कैटेगरी से भी ऊपर माना जाता है। इस खतरनाक स्तर का प्रदूषण हर व्यक्ति को रोजाना लगभग 18-20 सिगरेट के बराबर जहरीली हवा अंदर लेने पर मजबूर कर रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी अधिक मात्रा में प्रदूषित हवा का असर तुरंत फेफड़ों, दिल और दिमाग पर पड़ता है। बच्चों में सांस लेने में तकलीफ, खांसी, आंखों में जलन और एलर्जी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। बुजुर्गों और पहले से बीमार मरीजों के लिए यह हवा और भी घातक साबित हो सकती है। खासकर अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, सीओपीडी, हार्ट डिजीज़ और शुगर के मरीजों में जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषण के कारण शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित होती है, जिससे थकान, सिरदर्द, चक्कर और सांस फूलने की शिकायत बढ़ने लगती है। लंबे समय तक इस प्रदूषित वातावरण में रहने से फेफड़ों की क्षमता घट सकती है और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि पराली जलना, वाहन उत्सर्जन, फैक्ट्री धुआं, निर्माण कार्य और मौसम का बदलता पैटर्न इस प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कण आसानी से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जो धीरे-धीरे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं।

ऐसे हालात में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लोग संभव हो तो घर के अंदर रहें, एन-95 या उच्च गुणवत्ता वाले मास्क का उपयोग करें, एयर प्यूरिफायर चलाएं और सुबह-सुबह कसरत से बचें क्योंकि उस समय हवा में विषैले कण ज्यादा सक्रिय होते हैं। पानी ज्यादा पिएं और पोषणयुक्त भोजन लें, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे।

दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण की यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य बल्कि जीवनशैली पर भी गंभीर असर डाल रही है। विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि यदि तुरंत और ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में स्थिति और खराब हो सकती है।

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