Delhi Car Blast: तुर्किये मीटिंग से लेकर अल-फलाह यूनिवर्सिटी तक—कमरा नंबर 13 और 4 से मिली डायरियों ने खोली साजिश की परतें


 दिल्ली कार ब्लास्ट की जांच में सुरक्षा एजेंसियों को लगातार चौंकाने वाले सबूत मिल रहे हैं। जैश-ए-मोहम्मद और गजवात-उल-हिंद से जुड़े तीन आतंकियों के नाम सामने आने के बाद अब जांच का फोकस तुर्किये में हुई एक संदिग्ध ‘मीटिंग’ और हरियाणा की अल-फलाह यूनिवर्सिटी की ओर मुड़ गया है। माना जा रहा है कि ब्लास्ट की योजना कई चरणों में तैयार की गई थी, जिनमें विदेश में हुई मुलाकात, डिजिटल बातचीत और यूनिवर्सिटी कैंपस में की गई प्लानिंग शामिल थी।

जांच अधिकारियों के अनुसार, यूनिवर्सिटी के कमरा नंबर 13, जहां मुजम्मिल गनाई रहता था, साजिश का अहम केंद्र था। यह वही जगह थी जहां बैठकर कई बार ऑनलाइन ‘कमांड’ और निर्देशों का आदान-प्रदान हुआ। बताया जाता है कि एक्टिव आतंकियों से जुड़े कुछ विदेशी नंबर इसी कमरे से ट्रेस किए गए हैं। कमरे से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, नोटबुक और कुछ अलग-अलग पन्नों पर लिखे कोड व संदर्भ बताते हैं कि यहां लंबे समय से प्लानिंग की गतिविधियां चल रही थीं।

इसी तरह कमरा नंबर 4, जहां उमर उन नबी ठहरता था, से भी जांच टीम को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं। इन दस्तावेजों में कई नंबर, संक्षिप्त नाम और संदिग्ध कोड शामिल हैं। खास बात यह है कि दोनों कमरों से मिली डायरियों में 8 से 12 नवंबर के बीच की तारीखें बार-बार दर्ज थीं। इन तारीखों से संकेत मिलता है कि इन्हीं दिनों के बीच साजिश के अंतिम चरण को अमल में लाने की तैयारी हुई थी। कुछ पन्नों में ऐसे कोडित शब्द भी मिले हैं जिन्हें डिक्रिप्ट करने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।

एजेंसियों का मानना है कि इन नोटबुक और डायरियों में दिए गए संकेत कई स्तरों की गुप्त गतिविधियों की ओर इशारा करते हैं—जैसे लोकेशन बदलने की योजना, किस-समय क्या करना है, किसे संपर्क करना है और किन रास्तों से मूवमेंट होना है। ये विवरण दिखाते हैं कि पूरी साजिश अत्यंत सुनियोजित तरीके से रची गई थी और इसमें कई स्थानों तथा कई लोगों की भूमिका रही।

वहीं, तुर्किये में हुई कथित ‘मीटिंग’ को इस केस की रीढ़ माना जा रहा है। जांच में पता चला है कि इसी मीटिंग में ऑपरेशन का ब्लूप्रिंट तैयार किया गया था। इसके बाद भारतीय मॉड्यूल को लगातार डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिये निर्देश भेजे जाते रहे।

फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां बरामद दस्तावेजों, फोन रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा और विदेश में हुई मीटिंग के लिंक को जोड़कर साजिश की पूरी तस्वीर बनाने में जुटी हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ कई और खुलासे होने की संभावना है।

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