Delhi Blast Conspiracy: दिल्ली को दहलाने की साजिश नाकाम, कई गाड़ियों में रखे गए थे विस्फोटक


 दिल्ली में एक बड़ा आतंकी हमला टल गया है। जांच एजेंसियों ने राजधानी में कई गाड़ियों में रखे विस्फोटक बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आतंकियों की योजना 26/11 जैसे हमले को अंजाम देने की थी। बताया जा रहा है कि इस साजिश को बाबरी विध्वंस की बरसी (6 दिसंबर) के दिन अंजाम देने की तैयारी थी।

चार शहर निशाने पर थे

जांच में खुलासा हुआ है कि आतंकियों का नेटवर्क सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं था। उनकी योजना चार अलग-अलग शहरों को निशाना बनाने की थी। इसके लिए आतंकियों ने खुद को दो-दो के समूहों में बांटा था। हर समूह अपने साथ कई IED (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) लेकर निकलने वाला था। इन विस्फोटकों का इस्तेमाल सार्वजनिक स्थलों, बाजारों और सरकारी इमारतों के आसपास धमाका करने के लिए किया जाना था।

मुख्य साजिशकर्ता डॉक्टर उमर

इस पूरे हमले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है डॉ. उमर, जिसने 6 दिसंबर को बाबरी विध्वंस की बरसी के दिन दिल्ली में 26/11 जैसी वारदात को दोहराने की योजना बनाई थी। उमर पहले भी आतंक से जुड़े मामलों में संलिप्त रहा है और माना जा रहा है कि उसने इस बार बड़े पैमाने पर विस्फोट की योजना तैयार की थी।

जांच एजेंसियों को शक है कि उमर ने पाकिस्तान या अफगानिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से संपर्क साधा था, और तकनीकी सहयोग भी उन्हीं से मिला था।

कैसे पकड़ी गई साजिश

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की संयुक्त कार्रवाई में यह साजिश बेनकाब हुई। खुफिया इनपुट के आधार पर कई जगह छापेमारी की गई, जहां से विस्फोटक सामग्री, नक्शे और फर्जी पहचान पत्र बरामद किए गए। बताया जा रहा है कि आतंकियों ने हमले की तैयारी पूरी कर ली थी, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता ने इसे समय रहते रोक दिया।

राजधानी में हाई अलर्ट

दिल्ली समेत देश के अन्य बड़े शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और प्रमुख बाजारों में पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती की गई है। साथ ही, खुफिया एजेंसियां नेटवर्क के बाकी सदस्यों की तलाश में जुटी हैं।

निष्कर्ष

इस साजिश के नाकाम होने से राजधानी को एक बड़े हमले से बचा लिया गया है। लेकिन जांच एजेंसियों का कहना है कि आतंकी संगठन अब भी सक्रिय हैं और देश की सुरक्षा को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि आतंकी खतरा खत्म नहीं हुआ है — सतर्कता और खुफिया निगरानी ही देश की सुरक्षा की सबसे बड़ी ढाल है।

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