Delhi Airport GPS Hack: ‘सिग्नल ब्लास्टिंग’ से हुई थी छेड़छाड़ — जांच में खुलासा, ISRO का NavIC बना सकता है सुरक्षा की नई दीवार


 दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 7 नवंबर को हुई तकनीकी गड़बड़ी के पीछे एक बड़ा साइबर खतरा सामने आया है। जांच में पता चला है कि इस घटना में एयरपोर्ट के GPS नेविगेशन सिस्टम के साथ छेड़छाड़ की गई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, हैकर्स ने Signal Spoofing और Signal Blasting तकनीक का इस्तेमाल कर विमान के नेविगेशन सिस्टम को गलत पोजिशन दिखाने की कोशिश की।

घटना के समय लैंडिंग और टेक-ऑफ के दौरान पायलटों को ऑनबोर्ड सिस्टम में असामान्य निर्देशांक दिखाई देने लगे, जिससे एयर ट्रैफिक कंट्रोल को फ्लाइट ऑपरेशंस में बदलाव करना पड़ा। गनीमत रही कि ATC और पायलटों ने स्थिति को तुरंत संभाल लिया और किसी भी तरह की सुरक्षा दुर्घटना से बचा लिया गया।

GPS Hack कैसे किया गया?
विशेषज्ञों का कहना है कि हैकर्स ने एयरपोर्ट की सीमा के काफी नजदीक से हाई-पावर फर्जी GPS सिग्नल प्रसारित किए, जो असली संकेतों से अधिक शक्तिशाली थे। इस वजह से

  • विमान का नेविगेशन सिस्टम गुमराह हो गया

  • असली लोकेशन की जगह गलत पोजिशन दिखाई देने लगी

  • ऑटो-लैंडिंग सिस्टम पर खतरा बढ़ गया

इस प्रकार का हमला भारत में पहली बार इतने हाई-सिक्योरिटी एरिया पर देखा गया है।

क्यों बना GPS एक बड़ा खतरा?
GPS एक अमेरिकी सिस्टम है और इसके सिग्नल आसानी से जैम या स्पूफ किए जा सकते हैं। दुनिया भर में ड्रोन और विमान सुरक्षा को लेकर इस कमजोरी पर पहले से चिंता रही है।

NavIC: भारत का सुरक्षा कवच बनने की तैयारी
इस घटना के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने सुझाव दिया है कि विमान और महत्वपूर्ण नेविगेशन सिस्टम में ISRO के स्वदेशी NavIC (Navigation with Indian Constellation) को शामिल करने की प्रक्रिया तेज की जाए।
NavIC की खासियतें:

  • भारत और पड़ोसी क्षेत्रों में अत्यंत सटीक नेविगेशन

  • GPS की तुलना में छेड़छाड़ करना मुश्किल

  • सैन्य-स्तर की एन्क्रिप्टेड सिग्नल तकनीक

  • दोहरी फ़्रीक्वेंसी प्रणाली से स्पूफिंग प्रोटेक्शन

एविएशन विशेषज्ञों का कहना है कि GPS और NavIC सिस्टम को हाइब्रिड मोड में अपनाने से सुरक्षा कई गुना बढ़ जाएगी और ऐसे हमलों को विफल किया जा सकेगा।

बढ़ सकता है साइबर टेररिज्म का खतरा
जांच एजेंसियां अब इस हमले के स्रोत और इरादे की पड़ताल कर रही हैं। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना साइबर आतंकवाद की नई रणनीति का संकेत हो सकती है।

यह चौंकाने वाला मामला बताता है कि भविष्य की लड़ाई डिजिटल संकेतों और तकनीक पर होने वाली है। ऐसे में भारत को अपनी स्वदेशी तकनीकी ढाल — NavIC — को जल्द से जल्द अपनाने की जरूरत है, जिससे आसमान में उड़ानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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