दिल्ली में आयोजित डिफेंस डायलॉग के दौरान भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने देश की रक्षा नीति और आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप पूरी तरह तकनीक-आधारित होगा, लेकिन इसके केंद्र में इंसान ही रहना चाहिए।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और ऑटोमेशन जैसी तकनीकें युद्ध की दिशा बदल रही हैं, परंतु इनका प्रभावी उपयोग तभी संभव है जब सैनिक इनका सही ज्ञान रखें। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि भारत में एआई के क्षेत्र में प्रशिक्षित सैन्य प्रतिभा की कमी है, जिसे दूर करने के लिए सेना अब कदम उठा रही है।
सेना प्रमुख ने कहा, “भविष्य की लड़ाई स्मार्ट मशीनों और बुद्धिमान सैनिकों के बीच तालमेल पर आधारित होगी। इसलिए हमारी रणनीति है कि हम अपने सैनिकों को सिर्फ हथियार चलाने वाला योद्धा नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से दक्ष विशेषज्ञ बनाएं।” उन्होंने बताया कि थल सेना अब अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और ड्रोन तकनीक को शामिल कर रही है।
जनरल द्विवेदी ने जोर देते हुए कहा कि तकनीक जरूरी है, लेकिन इंसान को केंद्र में रखना और भी आवश्यक है। उन्होंने कहा, “मशीनें तेजी से सोच सकती हैं, लेकिन रणनीति, नैतिक निर्णय और मानवीय संवेदनशीलता सिर्फ इंसान के पास होती है। इसलिए हमें ऐसे सैनिक तैयार करने हैं जो तकनीक का उपयोग करके बेहतर और सटीक निर्णय ले सकें।”
थल सेना प्रमुख ने यह भी उल्लेख किया कि भारत की रक्षा नीति को जमीन की वास्तविकता और तकनीकी नवाचारों के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना होगा। उनके अनुसार, भविष्य का युद्ध केवल सीमा पर नहीं, बल्कि साइबर और सूचना के मोर्चों पर भी लड़ा जाएगा।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि भारतीय सेना “मानव और मशीन के सह-अस्तित्व के सिद्धांत” पर काम कर रही है। यह नया मॉडल ऐसा होगा जिसमें सैनिक न केवल तकनीक के उपयोगकर्ता होंगे, बल्कि उसके विकास और अनुकूलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
जनरल द्विवेदी का यह दृष्टिकोण इस बात की पुष्टि करता है कि भारत की सेना आने वाले वर्षों में ‘स्मार्ट सोल्जर, स्मार्ट आर्मी’ के सिद्धांत को अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है
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