पूर्व CJI गवई का अनोखा सम्मान: शपथ ग्रहण के बाद नए CJI सूर्यकांत को लगाया गले, अपनी आधिकारिक कार भी सौंपी


 राष्ट्रपति भवन में आज हुए शपथ ग्रहण समारोह में न्यायपालिका की गरिमा और परंपरा का एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस सूर्यकांत ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। यह शपथ राष्ट्रपति द्वारा दिलाई गई, और समारोह में सरकार, न्यायपालिका तथा अन्य संवैधानिक संस्थाओं के कई प्रमुख चेहरे मौजूद रहे। लेकिन इस पूरे कार्यक्रम के बाद जो दृश्य सामने आया, उसने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया और आने वाले वर्षों तक एक मिसाल के रूप में याद रखा जाएगा।

नए CJI सूर्यकांत के शपथ ग्रहण के तुरंत बाद, पद छोड़ चुके पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी. आर. गवई ने अत्यंत सौहार्द और सम्मान का भाव दिखाते हुए अपने उत्तराधिकारी को गले लगाया। यह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि भारतीय न्यायपालिका के भीतर आपसी सम्मान और संस्थागत मूल्यों का जीवंत उदाहरण था। गवई के इस gesture ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि न्यायपालिका में पद केवल जिम्मेदारी का संक्रमण है, न कि व्यक्तिगत अधिकार का विस्तार।

सबसे ध्यान खींचने वाली बात यह रही कि शपथ ग्रहण समारोह के बाद जस्टिस गवई ने एक अनोखी परंपरा की शुरुआत करते हुए अपनी आधिकारिक कार भी नए CJI को सौंप दी। सामान्यतः यह वाहन परिवर्तन कुछ औपचारिक प्रक्रियाओं और समय अंतराल के बाद होता है, लेकिन गवई ने स्वयं पहल करते हुए यह सुनिश्चित किया कि मुख्य न्यायाधीश पद से जुड़ी हर सुविधा और गरिमा नए पदस्थ व्यक्ति को तुरंत हस्तांतरित हो जाए। यह कदम भारतीय न्यायपालिका की गरिमा और अनुशासन को नए आयाम देता है।

इस पूरे घटनाक्रम को न्यायपालिका और संवैधानिक मूल्यों को मानने वालों ने अत्यंत सकारात्मक रूप में देखा। गवई के इस व्यवहार से यह भी स्पष्ट हुआ कि पद चाहे कितना भी ऊँचा क्यों न हो, व्यक्तित्व की विनम्रता और संस्थागत सम्मान हमेशा सर्वोपरि रहता है। उनके इस कदम को न्यायिक परंपराओं को मजबूती देने वाला तथा अगले पीढ़ी के न्यायाधीशों के लिए प्रेरणा स्रोत माना जा रहा है।

जस्टिस सूर्यकांत के लिए यह स्वागत न केवल स्नेहपूर्ण था बल्कि उनके नए कार्यकाल की शुरुआत को और भी विशेष बना गया। दोनों शीर्ष न्यायाधीशों के बीच यह सरल लेकिन महत्वपूर्ण संवाद भारतीय न्यायपालिका की परंपरा, अनुशासन और मर्यादा का सुंदर उदाहरण है, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए हमेशा प्रेरणादायी रहेगा।

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