कनाडा सरकार ने अपने नए बजट में वैश्विक टैलेंट और कुशल कर्मचारियों के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं। सरकार ने साफ कहा है कि आने वाले वर्षों में कनाडा की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए हाई-स्किल्ड प्रोफेशनल्स की जरूरत लगातार बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए टेक, रिसर्च और इनोवेशन सेक्टर में हजारों नौकरियों के अवसर सृजित किए जाएंगे।
बजट में खास तौर पर यह भी बताया गया कि H-1B वीजा धारकों के लिए नई नीतियों और प्रक्रियाओं को लागू किया जाएगा, जिससे वे बेहतर रोजगार और रहने के अवसर पा सकें। यह कदम खासकर अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। पिछले कुछ समय से अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम में बढ़ती सख्ती और अनिश्चितता के कारण कई H-1B वीजा धारक बेहतर विकल्प तलाश रहे थे, जिनमें कनाडा एक पसंदीदा डेस्टिनेशन बनता जा रहा है।
सरकार ने बजट में यह भी कहा है कि विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए रिसर्चर्स और टेक एक्सपर्ट्स का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। बजट दस्तावेज़ में साफ उल्लेख किया गया—
“इन रिसर्चर्स की दक्षता हमारी वैश्विक प्रतिस्पर्धा को आगे बढ़ाने और भविष्य की अर्थव्यवस्था में योगदान देने में मदद करेगी।”
यानी नई भर्ती और इमिग्रेशन नीतियों का मकसद कनाडा को आने वाले वर्षों में तकनीकी और आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाना है।
कनाडा सरकार पहले ही ग्लोबल टेक टैलेंट को आकर्षित करने के लिए स्टार्ट-अप वीजा, ग्लोबल टैलेंट स्ट्रीम और ओपन वर्क परमिट जैसी योजनाएं चला रही है। नए बजट में इन कार्यक्रमों को विस्तार देने के संकेत मिले हैं, जिससे AI, साइबर सिक्योरिटी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और बायोटेक सेक्टर में नौकरी के अवसर और बढ़ जाएंगे।
माना जा रहा है कि इस घोषणा के बाद भारत सहित दुनिया भर के हजारों युवा पेशेवर कनाडा में नौकरी के बेहतर अवसर तलाशने में रुचि दिखाएंगे। इमिग्रेशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह फैसला कनाडा को अंतरराष्ट्रीय टैलेंट का हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कुल मिलाकर, कनाडा का यह कदम न केवल कुशल कर्मचारियों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में देश की मजबूत स्थिति को भी दर्शाता है
.jpg)
0 टिप्पणियाँ