दुनियाभर में बाउल कैंसर तेजी से बढ़ता हुआ स्वास्थ्य संकट बन रहा है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का अनुमान है कि वर्ष 2040 तक हर साल लगभग 32 मिलियन नए बाउल कैंसर के मरीज सामने आ सकते हैं। यह संख्या वैश्विक स्वास्थ्य तंत्र पर भारी दबाव डाल सकती है। भारत में भी इस बीमारी के मामले चिंताजनक गति से बढ़ रहे हैं, खासकर युवा आबादी में इसका जोखिम तेजी से उभर रहा है।
अध्ययन में क्या पाया गया?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और हालिया अध्ययनों के अनुसार,
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50 वर्ष से कम उम्र की महिलाएं,
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जो नियमित रूप से अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF) खाती हैं,
उनमें बॉवेल पॉलिप बनने की संभावना अधिक पाई गई है।
बॉवेल पॉलिप को भविष्य में कैंसर विकसित होने का शुरुआती चरण माना जाता है। यानी ऐसे खान-पान वाले लोग आगे चलकर बाउल कैंसर के जोखिम का सामना कर सकते हैं।
क्या हैं अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड?
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड वे खाद्य पदार्थ हैं जिनमें:
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कृत्रिम रंग,
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फ्लेवर,
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संरक्षक (preservatives),
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और एडिटिव्स की मात्रा बहुत अधिक होती है।
इनमें पैकेट वाले स्नैक्स, इंस्टेंट नूडल्स, फ्रोजन फूड, पैकेज्ड मीठे पेय, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, कैंडीज आदि शामिल हैं। लंबे समय तक इनका सेवन आंतों में सूजन बढ़ाता है और पाचन तंत्र पर विपरीत प्रभाव डालता है।
बाउल कैंसर का खतरा क्यों बढ़ता है?
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अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में फाइबर की कमी होती है, जिससे आंतों की सफाई और कार्यक्षमता कम होती है।
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इनमें मौजूद ट्रांस फैट, सोडियम और रसायन आंतों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं।
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लगातार इन खाद्य पदार्थों के सेवन से आंतों की सूजन (inflammation) बढ़ती है, जो कैंसर की ओर ले जा सकती है।
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UPF के कारण मोटापा, हार्मोनल असंतुलन और आंतों के माइक्रोबायोम में बदलाव भी कैंसर जोखिम को बढ़ाते हैं।
कैसे रोकें बाउल कैंसर का खतरा?
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अपने आहार में फाइबर युक्त भोजन जैसे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालें शामिल करें।
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अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम से कम करें।
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नियमित व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली अपनाएं।
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समय-समय पर स्क्रीनिंग और चेकअप करवाते रहें, खासकर यदि परिवार में कैंसर का इतिहास हो।
समय रहते अलर्ट रहें
बाउल कैंसर अक्सर धीरे-धीरे विकसित होता है और शुरुआती चरण में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते। इसलिए खान-पान में सुधार और समय पर जांच आपकी जान बचा सकते हैं। यदि आप 40–50 की उम्र के बीच हैं और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का सेवन अधिक करते हैं, तो सावधान रहना और भी ज़रूरी है।
सही खान-पान ही बाउल कैंसर से सुरक्षा की सबसे बड़ी ढाल है।
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