Botswana Visit: बोत्सवाना पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, 21 तोपों की सलामी के साथ हुआ भव्य स्वागत — जानें क्यों खास है ये दौरा


 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपनी अफ्रीका यात्रा के अंतिम चरण में बोत्सवाना पहुंचीं, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। राजधानी गाबोरोन में राष्ट्रपति मुर्मू को 21 तोपों की सलामी और गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। यह दौरा ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की बोत्सवाना की पहली राजकीय यात्रा है।

🔹 ऐतिहासिक स्वागत और द्विपक्षीय वार्ता

बोत्सवाना के राष्ट्रपति मोकग्वीटसी एरिक मसिसी ने स्वयं एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति मुर्मू का स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता के दौरान व्यापार, निवेश, शिक्षा, रक्षा, डिजिटल सहयोग और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। भारत और बोत्सवाना ने इस यात्रा को "साझा विकास और सतत साझेदारी" की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

🔹 चीतों के पुनर्वास पर समझौता

दौरे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह समझौता है जिसके तहत कालाहारी रेगिस्तान से आठ चीतों को भारत भेजा जाएगा। ये चीते भारत के कूनो नेशनल पार्क (मध्य प्रदेश) में पुनर्वास परियोजना के तहत लाए जाएंगे। यह पहल दोनों देशों के बीच वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय सहयोग को नई दिशा देगी।

भारत और बोत्सवाना पहले भी वन्यजीव संरक्षण, खनन और स्वास्थ्य क्षेत्र में मिलकर काम कर चुके हैं। अब यह समझौता दोनों देशों के बीच "ग्रीन डिप्लोमेसी" का प्रतीक बन गया है।

🔹 आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग पर बल

राष्ट्रपति मुर्मू ने इस मौके पर कहा कि भारत और बोत्सवाना के संबंध साझे मूल्यों, लोकतांत्रिक परंपराओं और अफ्रीका में विकास साझेदारी पर आधारित हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि भारत बोत्सवाना को उसकी राष्ट्रीय विकास योजना 2036 के लक्ष्यों को हासिल करने में हर संभव सहयोग देगा।

दोनों देशों ने डिजिटल टेक्नोलॉजी, आईटी ट्रेनिंग, और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में भी नए समझौतों पर हस्ताक्षर किए। साथ ही, बोत्सवाना में भारतीय मूल के समुदाय की सक्रिय भूमिका की भी सराहना की गई, जो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु का कार्य कर रहा है।

🔹 भारत-बोत्सवाना संबंधों में नया अध्याय

यह दौरा न केवल कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अफ्रीका में भारत की “न्यू डेवलपमेंट पार्टनरशिप” रणनीति को भी सशक्त करता है। भारत अफ्रीकी देशों के साथ मिलकर सतत विकास, नवीकरणीय ऊर्जा और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग बढ़ा रहा है।

राष्ट्रपति मुर्मू की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि भारत अब अफ्रीका के साथ अपने संबंधों को “साझेदारी के नए युग” में ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है — जहां विकास, पर्यावरण और मानवता तीनों साथ-साथ आगे बढ़ेंगे।

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