खशोगी हत्या मामले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। ट्रंप ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बचाव में न केवल अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट पर सवाल उठाए, बल्कि व्हाइट हाउस में उनसे सवाल पूछने वाली पत्रकार पर भी कड़ा प्रहार किया।
घटना तब हुई जब एबीसी न्यूज की वरिष्ठ पत्रकार मैरी ब्रूस ने खशोगी हत्या में सऊदी क्राउन प्रिंस की भूमिका, खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट और ट्रंप प्रशासन की स्थिति को लेकर लगातार तीन तीखे सवाल पूछे। जवाब देने के बजाय ट्रंप भड़क गए और पत्रकार को "बहुत ही खराब रिपोर्टर" कहकर फटकार लगा दी।
यही नहीं, ट्रंप ने आगे बढ़कर एबीसी नेटवर्क के ब्रॉडकास्ट लाइसेंस रद्द करने की धमकी तक दे डाली। यह बयान अमेरिका में मीडिया की स्वतंत्रता पर सीधा सवाल खड़ा करता है और आलोचकों का कहना है कि यह प्रेस को डराने की कोशिश है।
खशोगी हत्या को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने पहले ही संकेत दिए थे कि सऊदी क्राउन प्रिंस की इसमें संभावित भूमिका रही हो सकती है। लेकिन ट्रंप ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि क्राउन प्रिंस के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं और वह सऊदी अरब के साथ अपने संबंधों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते।
ट्रंप के इस रुख ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या आर्थिक और रणनीतिक हितों के चलते व्हाइट हाउस मानवाधिकार उल्लंघन जैसे गंभीर मामलों पर समझौता कर रहा है। वहीं पत्रकार मैरी ब्रूस के साथ हुई तकरार ने मीडिया की स्वतंत्र आवाज़ पर सरकारी दखल के खतरे को भी उजागर कर दिया है।
यह पूरा मामला न केवल अमेरिकी राजनीति में नए विवाद को जन्म देता है बल्कि सऊदी-अमेरिका संबंधों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी कई गंभीर सवाल उठाता है।
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