अमेरिकी रिपोर्ट का बड़ा खुलासा: ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद चीन ने राफेल के खिलाफ चलाया दुष्प्रचार अभियान


 अमेरिकी कांग्रेस की एक हालिया वार्षिक रिपोर्ट में भारत, पाकिस्तान और चीन से जुड़े घटनाक्रम को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मई में हुए पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई थी। इस हमले के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा चलाए गए ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान दोनों देशों के बीच करीब चार दिनों तक सैन्य तनाव और सीमित संघर्ष की स्थिति बनी रही।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस दौर में जहां भारत ने अपनी सामरिक स्थिति मजबूत बनाए रखी, वहीं दूसरी ओर चीन ने अपने हित साधने के लिए एक अलग रणनीति अपनाई। चीन ने भारत द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे लड़ाकू विमान राफेल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुष्प्रचार अभियान चलाया।

अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने अपने लड़ाकू विमानों की बिक्री बढ़ाने और वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में राफेल की छवि खराब करने का प्रयास किया। इस दुष्प्रचार अभियान के तहत एआई-जनरेटेड तस्वीरों और वीडियो गेम्स के सीन्स को असली लड़ाकू हालात बताकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैलाया गया। इनका उद्देश्य यह दिखाना था कि राफेल युद्ध के दौरान उतना प्रभावी नहीं है जितना भारत दावा करता है।

रिपोर्ट में जोर दिया गया कि चीन की इस गतिविधि का मकसद सिर्फ भारत की सैन्य क्षमता पर सवाल उठाना नहीं था, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में अपने विमान—जैसे कि J-10 और JF-17—की संभावित बिक्री को बढ़ावा देना था।

अमेरिकी दस्तावेज बताता है कि भारत इन दुष्प्रचार गतिविधियों से अवगत रहा और उसने इनके प्रभाव को सीमित रखने के लिए रणनीतिक संचार और तथ्य-आधारित जवाबों का इस्तेमाल किया। इस खुलासे ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों का नहीं, बल्कि सूचना और प्रचार की लड़ाई भी है।

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