तिरंगे की उम्र बढ़ेगी, सालाना एक करोड़ किलो पॉलिस्टर का बोझ घटेगा

देश में अब राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगे) की उम्र बढ़ाने और पर्यावरणीय बोझ कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पानीपत में देश का पहला राष्ट्रीय ध्वज रिसाइकलिंग सेंटर तैयार हो चुका है, जिसका उद्घाटन शुक्रवार को किया जाएगा। इस पहल से न केवल तिरंगे की गुणवत्ता और टिकाऊपन में सुधार होगा, बल्कि पर्यावरण पर पड़ने वाला पॉलिस्टर का भारी बोझ भी काफी कम होगा।

फिलहाल देश में हर साल बड़ी मात्रा में पॉलिस्टर आधारित तिरंगे बनाए और इस्तेमाल किए जाते हैं। इनके नष्ट होने की प्रक्रिया लंबी होती है, जिससे पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़ता है। नए रिसाइकलिंग सेंटर के शुरू होने से करीब एक करोड़ किलो पॉलिस्टर का वार्षिक भार कम होगा, क्योंकि पुराने या क्षतिग्रस्त तिरंगों को अब वैज्ञानिक तरीके से रिसाइकल किया जा सकेगा। इससे तिरंगे के निर्माण में अधिक टिकाऊ और पर्यावरण हितैषी सामग्री का उपयोग संभव होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम तिरंगे के सम्मान को बनाए रखते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। इसके साथ ही यह पहल भारत को टिकाऊ उत्पादन और रिसाइकलिंग तकनीक के क्षेत्र में एक नई दिशा देगी।

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