मनोज तिवारी का बड़ा आरोप: “कोहली–रोहित टेस्ट क्रिकेट को बचाना चाहते थे, मगर माहौल ने बाहर किया” — क्या सच में टीम इंडिया के भीतर था तनाव?

भारत के पूर्व क्रिकेटर और बंगाल के मंत्री मनोज तिवारी ने हाल ही में एक ऐसा बयान दिया है, जिसने भारतीय क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी है। उनका दावा है कि विराट कोहली और रोहित शर्मा, जो आधुनिक युग के दो सबसे सफल भारतीय खिलाड़ी माने जाते हैं, टेस्ट क्रिकेट को बचाने की पुरजोर कोशिश कर रहे थे। लेकिन टीम के भीतर का “माहौल” और “बदलती परिस्थितियाँ” उन्हें इस फॉर्मेट से दूर करने का कारण बनीं। तिवारी का यह आरोप कई सवाल खड़े करता है—क्या वास्तव में भारतीय टीम में ऐसा वातावरण बन चुका था जो सीनियर खिलाड़ियों के लिए प्रतिकूल हो गया था, या यह केवल सामान्य ट्रांज़िशन प्रक्रिया को लेकर उठी एक राजनैतिक बहस है?

मनोज तिवारी का कहना है कि कोहली और रोहित दोनों ही टेस्ट क्रिकेट की अहमियत समझते थे और इस फॉर्मेट को मजबूत बनाए रखना चाहते थे। तिवारी के अनुसार, दोनों खिलाड़ियों ने वर्षों तक भारतीय टेस्ट टीम की कमान संभाली और देश को कई यादगार जीत दिलाई। चाहे ऑस्ट्रेलिया की ऐतिहासिक सीरीज़ जीत हो या इंग्लैंड में उल्लेखनीय प्रदर्शन—इन दोनों ने भारतीय टेस्ट क्रिकेट को विश्व पटल पर नई पहचान दी। ऐसे में उनका अचानक टेस्ट से अलग होना कई क्रिकेट प्रेमियों और विश्लेषकों के लिए सवालों का कारण बन गया है।

तिवारी ने यह भी इशारा किया कि चयन प्रक्रिया और टीम प्रबंधन के कुछ निर्णयों ने माहौल को ऐसा बना दिया कि दोनों दिग्गज खिलाड़ियों का टेस्ट क्रिकेट में आगे बने रहना मुश्किल हो गया। हालांकि, उन्होंने इस “माहौल” का विस्तार से वर्णन नहीं किया, लेकिन इतना जरूर कहा कि यह पूरी तरह स्वाभाविक क्रिकेट ट्रांज़िशन नहीं था।

क्रिकेट विशेषज्ञों का भी मानना है कि बीसीसीआई टेस्ट टीम में नए खिलाड़ियों को मौका देने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। युवा खिलाड़ियों की एंट्री से टीम में एक नया उत्साह जरूर आता है, लेकिन इससे सीनियर खिलाड़ियों की जगह पर अनिश्चितता भी पैदा होती है। क्या यह अनिश्चितता कोहली-रोहित पर भी लागू हुई? यह सवाल अब चर्चा में है।

फिलहाल मनोज तिवारी के बयान ने इस मुद्दे को और गर्मा दिया है। आने वाले दिनों में संभव है कि अन्य पूर्व खिलाड़ी, चयनकर्ता या बीसीसीआई अधिकारी भी अपनी राय रखें। इससे यह स्पष्ट हो पाएगा कि क्या तिवारी के आरोपों में दम है या यह सिर्फ चयन नीति और ट्रांज़िशन को लेकर उठ रही सामान्य असहमति का राजनीतिक रूप है।

जो भी हो, इतना तय है कि कोहली और रोहित जैसे महान खिलाड़ियों की टेस्ट क्रिकेट से दूरी भारतीय फैंस के लिए हमेशा एक भावनात्मक विषय रहेगा, और इस नए बयान ने उस भावनात्मक बहस को एक नई दिशा दे दी है।

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